लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने शनिवार को प्रदेशभर में श्रद्धांजलि दिवस मनाते हुए वर्ष 2017 में समायोजन निरस्त होने के बाद दिवंगत हुए शिक्षामित्रों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर संघ ने शिक्षामित्रों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा।
संघ का कहना है कि शिक्षामित्र लंबे समय से अपने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। ऐसे में सरकार को उनकी समस्याओं के समाधान के लिए जल्द सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए, ताकि उन्हें स्थायी राहत मिल सके।
मुख्य बातें
- प्रदेशभर में शिक्षामित्रों ने श्रद्धांजलि दिवस मनाया।
- मुख्यमंत्री के नाम नियमितीकरण सहित विभिन्न मांगों का ज्ञापन भेजा गया।
- विशेष TET में शिक्षामित्रों को शामिल करने की मांग दोहराई गई।
- मूल विद्यालय में जल्द वापसी और उचित मानदेय की मांग उठाई गई।
- सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने तथा मृतक शिक्षामित्रों के आश्रितों को नौकरी देने की मांग भी की गई।
प्रदेशभर में हुए कार्यक्रम
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के आह्वान पर गोंडा, बस्ती, आगरा, हाथरस, बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत, प्रयागराज, भदोही, बिजनौर समेत कई जिलों में श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया गया। इस दौरान शिक्षामित्रों ने वर्ष 2017 के बाद दिवंगत हुए साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और सरकार से लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।
गोंडा में संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। अन्य जिलों में भी स्थानीय पदाधिकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाईं।
नियमितीकरण सहित कई मांगें उठाईं
ज्ञापन में शिक्षामित्रों ने कहा कि वे वर्षों से प्राथमिक विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी प्रमुख मांगों का समाधान नहीं हो सका है। उन्होंने सरकार से जल्द नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।
संघ ने यह भी मांग की कि बेसिक शिक्षकों के लिए प्रस्तावित विशेष TET में शिक्षामित्रों को शामिल किया जाए, ताकि उन्हें स्थायी शिक्षक बनने का अवसर मिल सके। इसके अलावा मूल विद्यालय में शीघ्र वापसी की मांग भी दोहराई गई।
मानदेय और सेवा संबंधी मांगों पर भी जोर
संघ ने सरकार से शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने, वर्ष के सभी 12 महीनों का मानदेय देने और सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष निर्धारित करने की मांग की। साथ ही सेवा के दौरान दिवंगत होने वाले शिक्षामित्रों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने की मांग भी उठाई गई।
प्रदेश संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षामित्र लंबे समय से अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। सरकार को उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने एक बार फिर नियमितीकरण और अन्य लंबित मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है। अब शिक्षामित्रों की नजर राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी है कि उनकी मांगों पर कब और क्या निर्णय लिया जाता है।


