बड़ी खबर: SHARDA सर्वे में शिक्षकों की भी लगेगी ड्यूटी, महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने जारी किए संशोधित निर्देश
उत्तर प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने SHARDA (स्कूल हर दिन आए) अभियान के अंतर्गत आउट ऑफ स्कूल बच्चों के चिन्हांकन एवं नामांकन के लिए परिवार सर्वेक्षण संबंधी संशोधित निर्देश जारी कर दिए हैं। पहले 13 जुलाई 2026 के आदेश में यह कार्य केवल बीटीसी/डीएलएड प्रशिक्षुओं से कराए जाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब जारी नए आदेश में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को भी इस सर्वेक्षण कार्य में शामिल करने की अनुमति दे दी गई है।
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा द्वारा जारी संशोधित आदेश के अनुसार, 16 जुलाई 2026 से 14 अगस्त 2026 के बीच 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान के लिए परिवार सर्वेक्षण कराया जाएगा। कई जनपदों में डीएलएड प्रशिक्षुओं की संख्या कम होने, प्रशिक्षण न होने तथा कांवड़ मेले एवं अवकाश जैसी परिस्थितियों के कारण समय पर सर्वे पूरा कराने में कठिनाई की जानकारी शासन को दी गई थी। इसी को देखते हुए यह संशोधित निर्णय लिया गया है।
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संशोधित आदेश की मुख्य बातें
- 16 जुलाई से 14 अगस्त 2026 तक परिवार सर्वेक्षण कराया जाएगा।
- ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वे का कार्य संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक, शिक्षामित्र एवं अनुदेशक कराएंगे।
- नगर क्षेत्रों, अस्थायी बस्तियों, ईंट-भट्ठों, कारखानों, होटलों, ढाबों, मलिन बस्तियों और झुग्गी-झोपड़ियों में सर्वे बीटीसी/डीएलएड प्रशिक्षुओं के माध्यम से कराया जाएगा।
- सर्वे के अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) की होगी।
- 13 जुलाई 2026 के आदेश में निर्धारित प्रोत्साहन राशि केवल बीटीसी/डीएलएड प्रशिक्षुओं को ही देय होगी।
- शिक्षकों, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों द्वारा किए जाने वाले सर्वे के लिए आवश्यक सर्वे प्रपत्र DIET द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस संशोधित आदेश के बाद स्पष्ट हो गया है कि SHARDA अभियान के तहत आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान और उन्हें विद्यालयों में नामांकित कराने की जिम्मेदारी अब केवल प्रशिक्षुओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विद्यालयों के शिक्षक भी इस महत्वपूर्ण अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।



