लखनऊ। प्रदेश में कार्यरत शिक्षिकाओं के मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया गया है। निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि केवल इस आधार पर मातृत्व अवकाश का आवेदन निरस्त नहीं किया जा सकता कि पहले प्रसव के दो वर्ष पूरे नहीं हुए हैं। ऐसे मामलों में Maternity Benefit Act, 1961 के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा।
जारी निर्देश के अनुसार, कई स्थानों पर यह शिकायतें सामने आई थीं कि कुछ बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) एवं खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) शिक्षिकाओं के मातृत्व अवकाश के आवेदन इस आधार पर अस्वीकृत कर रहे हैं कि पहले प्रसव के दो वर्ष पूरे होने से पहले ही पुनः अवकाश का आवेदन किया गया है। निर्देश में कहा गया है कि यह कार्रवाई Maternity Benefit Act, 1961 के प्रावधानों के विपरीत है।
निर्देश में यह भी उल्लेख किया गया है कि कोई भी शासनादेश अथवा वित्तीय हस्त पुस्तिका देश के लागू कानून (Law of the Land) से ऊपर नहीं हो सकती। साथ ही हाल ही में माननीय उच्च न्यायालय ने भी ऐसी परिस्थितियों में मातृत्व अवकाश स्वीकृत किए जाने के संबंध में टिप्पणी करते हुए संबंधित अधिकारियों को कानून के अनुरूप निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
सभी BSA एवं BEO को निर्देशित किया गया है कि वे मातृत्व अवकाश से जुड़े मामलों में Maternity Benefit Act, 1961 के प्रावधानों का पूर्ण पालन करें तथा अनावश्यक न्यायिक विवाद (Litigation) से बचें। साथ ही शिक्षिकाओं के मामलों में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की भी अपेक्षा की गई है।
निर्देश में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में इसके विपरीत कोई मामला संज्ञान में आता है, तो उसे अनुशासनहीनता एवं कदाचार माना जाएगा और संबंधित अधिकारी के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
बताया गया है कि यह निर्देश महानिदेशक महोदय के अनुमोदन के उपरांत जारी किया गया है।


