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DBT राशि के उपयोग पर सरकार सख्त, BSA और प्रधानाध्यापकों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी

Sir Ji Ki Pathshala

स्कूल ड्रेस, जूते और स्टेशनरी की खरीद को लेकर सरकार सख्त, सभी BSA और प्रधानाध्यापकों को जारी हुए नए निर्देश

लखनऊ | 16 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए संचालित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से नया शासनादेश जारी किया है। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि विद्यार्थियों के अभिभावकों के बैंक खातों में भेजी जाने वाली DBT राशि का उपयोग केवल निर्धारित शैक्षणिक सामग्री की खरीद के लिए ही किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA), खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) और प्रधानाध्यापकों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

UP DBT New Guidelines 2026 शासनादेश, स्कूल ड्रेस और स्टेशनरी खरीद संबंधी नए निर्देश

अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी पत्रांक 2734/2026-27 (दिनांक 16 जुलाई 2026) में कहा गया है कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक विद्यार्थी को समय पर स्कूल ड्रेस, जूते, मोजे, स्वेटर, स्कूल बैग एवं स्टेशनरी जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना है। यदि धनराशि का उपयोग किसी अन्य कार्य में किया जाता है तो योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित होता है। इसी कारण अब विद्यालय स्तर से लेकर जिला स्तर तक इसकी नियमित निगरानी की जाएगी।

उत्तर प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा परिषद के परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 8 तक के पात्र विद्यार्थियों के अभिभावकों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से धनराशि भेजती है। इस धनराशि का उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए स्कूल ड्रेस, जूते, मोजे, स्वेटर, स्कूल बैग और स्टेशनरी जैसी आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक कारणों से किसी भी बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो।

बेसिक शिक्षा विभाग के संज्ञान में यह बात आई कि कई स्थानों पर DBT के माध्यम से भेजी गई राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य घरेलू आवश्यकताओं में किया जा रहा था। इसके कारण अनेक विद्यार्थियों के पास पूरे शैक्षणिक सत्र में स्कूल ड्रेस, जूते, बैग और स्टेशनरी जैसी मूलभूत सामग्री उपलब्ध नहीं हो पा रही थी। ऐसी स्थिति को रोकने और योजना का लाभ प्रत्येक पात्र विद्यार्थी तक पहुंचाने के लिए सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

शासन द्वारा जारी प्रमुख निर्देश

  • अभिभावकों को जागरूक करें: प्रधानाध्यापक DBT राशि के उद्देश्य और उसके सही उपयोग के बारे में अभिभावकों को व्यक्तिगत रूप से जागरूक करेंगे। इसके लिए विद्यालय प्रबंध समिति (SMC), ग्राम पंचायत एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाएगा।

  • PTM में अनिवार्य समीक्षा: प्रत्येक अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) में DBT राशि के उपयोग की समीक्षा की जाएगी तथा अभिभावकों को गुणवत्तापूर्ण सामग्री खरीदने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

  • समय पर सामग्री की खरीद: धनराशि प्राप्त होने के बाद अभिभावक निर्धारित सामग्री जैसे ड्रेस, जूते, मोजे, बैग, स्वेटर एवं स्टेशनरी की खरीद शीघ्र करें, ताकि पूरे शैक्षणिक सत्र में उसका उपयोग हो सके।

  • स्कूल ड्रेस का उचित उपयोग: विद्यार्थियों को स्कूल ड्रेस मुख्य रूप से विद्यालय एवं विद्यालयी गतिविधियों के दौरान ही पहनने के लिए प्रेरित किया जाए। सामाजिक या पारिवारिक कार्यक्रमों में अन्य वस्त्र पहनने की सलाह दी जाए, ताकि ड्रेस लंबे समय तक सुरक्षित रहे।

  • सामग्री का रख-रखाव: विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को स्कूल ड्रेस, जूते, मोजे, स्वेटर, बैग और स्टेशनरी की साफ-सफाई एवं सुरक्षित रख-रखाव के लिए प्रेरित किया जाए।

  • वंचित विद्यार्थियों की पहचान: जिन विद्यार्थियों के पास निर्धारित सामग्री उपलब्ध नहीं है, उनकी पहचान कर अभिभावकों से संपर्क किया जाए। साथ ही बैंक खाता सक्रिय है या नहीं तथा आधार सीडिंग की स्थिति भी जांची जाए।

  • विद्यालय स्तर पर निगरानी: प्रधानाध्यापक विद्यार्थीवार अभिलेख तैयार करें और सुनिश्चित करें कि सभी पात्र विद्यार्थियों ने निर्धारित सामग्री खरीद ली है तथा उसका उपयोग कर रहे हैं।

  • विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) की भागीदारी: विद्यालय प्रबंध समिति को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभानी होगी तथा समय-समय पर इसकी समीक्षा करनी होगी।

  • समावेशी वातावरण सुनिश्चित करें: किसी भी विद्यार्थी के साथ ड्रेस या अन्य सामग्री के अभाव में भेदभावपूर्ण व्यवहार न किया जाए। सभी विद्यार्थियों को सम्मानजनक एवं समावेशी वातावरण में शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।

  • खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) द्वारा निरीक्षण: BEO नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे और शासनादेश के अनुपालन की समीक्षा करेंगे। आवश्यकता होने पर सुधारात्मक कार्रवाई भी सुनिश्चित करेंगे।

  • जिला स्तर पर समीक्षा: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) योजना के क्रियान्वयन, सामग्री खरीद, जागरूकता गतिविधियों एवं विद्यालयों की प्रगति की नियमित समीक्षा करेंगे।

  • लापरवाही पर कार्रवाई: शासनादेश के निर्देशों का पालन न करने या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • एक माह के भीतर खरीद सुनिश्चित करें: अभिभावकों को DBT राशि प्राप्त होने के एक माह के भीतर निर्धारित सामग्री खरीदने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी को समय पर आवश्यक शैक्षिक सामग्री उपलब्ध हो सके।

अभिभावकों को किन बातों का रखना होगा ध्यान?

शासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे DBT की राशि का उपयोग केवल बच्चों की शैक्षणिक सामग्री खरीदने में करें। धनराशि प्राप्त होने के बाद अनावश्यक विलंब न करते हुए निर्धारित सामग्री खरीद लें, बैंक खाता सक्रिय रखें, आधार सीडिंग सुनिश्चित करें तथा बच्चों को नियमित रूप से स्कूल ड्रेस पहनाकर विद्यालय भेजें।

उत्तर प्रदेश सरकार का यह नया शासनादेश केवल DBT धनराशि के वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की पहल है कि प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को समय पर आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध हो और सरकारी धन का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया जाए जिसके लिए वह प्रदान किया गया है। विद्यालय, अभिभावक और शिक्षा विभाग के समन्वित प्रयास से ही इस योजना का वास्तविक लाभ विद्यार्थियों तक पहुंच सकेगा। शासन को उम्मीद है कि नए दिशा-निर्देश लागू होने के बाद योजना का क्रियान्वयन और अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा परिणामकारी होगा।

UP DBT New Guidelines 2026: स्कूल ड्रेस और स्टेशनरी खरीद पर सरकार के नए निर्देश