लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विशेष शिक्षकों (Special Educators) और दिव्यांग बच्चों (CWSN) के शिक्षण क्षेत्र से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश शासन और महानिदेशक स्कूल शिक्षा कार्यालय द्वारा एक महत्वपूर्ण शासनादेश जारी किया गया है। इस शासनादेश के तहत राज्य में खाली पड़े विशेष शिक्षकों के लगभग 4,900 पदों पर भर्ती प्रक्रिया को तत्काल हरी झंडी दे दी गई है।
शासनादेश की मुख्य बातें और बड़े फैसले:
- 4,900 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती: दस्तावेजों के अनुसार, माननीय उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) को सूचित किया गया है कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में विशेष शिक्षकों के लगभग 4,900 पद खाली हैं। इन पदों को भरने के लिए राज्य सरकार को व्यापक प्रसार वाले दो प्रमुख हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी करने का निर्देश दिया गया है।
- TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अब अनिवार्य नहीं, केवल वांछनीय (Desirable): विशेष शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि अब इस भर्ती के लिए TET पास होना अनिवार्य योग्यता नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और आरसीआई (RCI) के हलफनामे के आलोक में, TET को केवल एक वांछनीय योग्यता (Desirable Qualification) माना जाएगा। यानी बिना TET पास अभ्यर्थी भी इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।
- आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों को भी मौका: शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में संविदा (Contract) या डेलीवेजेस (Daily Wages) पर कार्यरत स्पेशल एजुकेटर्स के साथ-साथ आउटसोर्सिंग एजेंसी (Outsourcing Agency) के माध्यम से नियुक्त स्पेशल एजुकेटर्स को भी विशेष शिक्षक (CWSN) के रूप में चयन और नियुक्ति के लिए विचार में लिया जाएगा।
- आवेदन के लिए मिलेगा 02 सप्ताह का समय: समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित होने की तिथि से योग्य अभ्यर्थियों को आवेदन करने के लिए पूरे 02 सप्ताह का समय प्रदान किया जाएगा।
- स्क्रीनिंग कमेटी करेगी चयन: प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी और चयन के लिए राज्य आयुक्त, दिव्यांगजन, उ०प्र० की अध्यक्षता में एक 'स्क्रीनिंग कमेटी' का गठन किया गया है। यदि कोई अभ्यर्थी अनुपयुक्त पाया जाता है, तो कमेटी को लिखित में सकारण आदेश पारित करना होगा।
- जुलाई 2026 तक की समय सीमा (Timeline): सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार इस पूरी चयन प्रक्रिया को बेहद तेजी से पूरा करना है। राज्य सरकार को इस मामले की अगली सुनवाई यानी जुलाई 2026 में माननीय कोर्ट के समक्ष 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (Action Taken Report) प्रस्तुत करनी होगी। शासनादेश में यह भी साफ कहा गया है कि जब तक यह मौजूदा प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक अन्य रिक्त पदों के लिए कोई नया विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शासन ने लिया निर्णय
यह आदेश माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली में योजित सिविल अपील संख्या- 132/2016 (रजनीश कुमार पाण्डेय व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य) में दिनांक 05.05.2026 को पारित आदेश के अनुपालन में जारी किया गया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा और महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी द्वारा संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।







