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'निपुण भारत मिशन' के तहत जुलाई से शुरू होगा प्राथमिक शिक्षकों का पांच दिवसीय FLN प्रशिक्षण, आदेश जारी

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और सरकारी विद्यालयों के शैक्षणिक स्तर को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने के लिए एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय (समग्र शिक्षा, उत्तर प्रदेश) द्वारा जारी आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार, आगामी शैक्षिक सत्र 2026-27 में राज्य के सभी परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को "निपुण विद्यालय" के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

FLN Teachers Training 2026-27 for UP Primary Teachers

​इस बड़े विजन को धरातल पर उतारने के लिए माह जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में फाउन्डेशनल लिटरेसी एण्ड न्यूमेरेसी (FLN) तथा एन.सी.ई.आर.टी. (NCERT) की नई पाठ्यपुस्तकों पर आधारित एक व्यापक पांच दिवसीय शिक्षक-प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। यह प्रशिक्षण ब्लॉक संसाधन केन्द्रों (BRC) पर चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जाएगा, जिसमें राज्य के लाखों प्राथमिक शिक्षक और शिक्षा मित्र भाग लेंगे।

​FLN प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य

​इस पांच दिवसीय सघन प्रशिक्षण का मूल ढांचा शिक्षकों के क्षमता संवर्द्धन और आधुनिक शिक्षण विधियों के व्यावहारिक प्रयोग पर केंद्रित है। इसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • निपुण विद्यालय का लक्ष्य हासिल करना: शिक्षकों का क्षमता संवर्द्धन करते हुए शैक्षिक सत्र 2026-27 के भीतर प्रदेश के समस्त परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को "निपुण विद्यालय" के निर्धारित मानकों तक पहुंचाना।

  • अकादमिक रणनीति की गहरी समझ: शिक्षकों में नए सत्र की अकादमिक प्राथमिकताओं और रणनीतियों के संबंध में एक गहन समझ विकसित करना।

  • कक्षा शिक्षण की प्रक्रिया में सुधार: निपुण भारत मिशन और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) के उद्देश्यों के अनुरूप छात्र-छात्राओं के अधिगम सम्प्राप्ति (Learning Outcomes) स्तर को बढ़ाना।

  • शिक्षण संदर्शिकाओं का प्रभावी उपयोग: दैनिक शिक्षण योजना के अनुसार कक्षा में संदर्शिकाओं के माध्यम से सुनियोजित और प्रभावी कक्षा-शिक्षण सुनिश्चित करना।

  • आकर्षक एवं आधुनिक शिक्षण वातावरण: विद्यालयों में उपलब्ध प्रिंटरिच सामग्री, टी.एल.एम. (TLM), मैथ व साइंस किट्स और लाइब्रेरी की पुस्तकों का सक्रिय उपयोग कर बच्चों के लिए आकर्षक अधिगम माहौल बनाना।

  • फार्मेटिव आकलन एवं रिमीडियल टीचिंग: बच्चों का निरंतर फॉर्मेटिव आकलन करना तथा सीखने में पीछे रह गए छात्र-छात्राओं को आवश्यकता आधारित विशेष अनुसमर्थन और उपचारात्मक (Remedial) शिक्षण प्रदान करना।

  • सहयोगात्मक पर्यवेक्षण: सहयोगात्मक पर्यवेक्षण के माध्यम से शिक्षकों को ऑनसाइट शैक्षिक सपोर्ट देना तथा शिक्षक संकुल बैठकों के माध्यम से पियर लर्निंग को बढ़ावा देना।

  • शिक्षक-विद्यार्थी आत्मीय संबंध: कक्षा के भीतर के माहौल को बदलने और बच्चों के साथ एक उत्कृष्ट आत्मीय व संवेगात्मक संबंध विकसित करने पर विशेष बल देना।

​दो चरणों में क्रियान्वित होगी प्रशिक्षण की रूपरेखा

​इस महा-अभियान की गुणवत्ता को अक्षुण्ण रखने के लिए प्रशिक्षण को दो महत्वपूर्ण स्तरों पर विभाजित किया गया है:

​1. डायट (DIET) स्तर पर ब्लॉक स्तरीय संदर्भदाताओं (Master Trainers) का प्रशिक्षण

  • संचालन: जुलाई 2026 के प्रथम सप्ताह में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) में प्राचार्य के निर्देशन में यह पांच दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित होगा।

  • प्रतिभागिता: इसमें प्रत्येक ब्लॉक और नगर क्षेत्र से 5 एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) और डायट मेंटर्स प्रतिभाग करेंगे। यदि किसी विकासखण्ड में ए.आर.पी. की संख्या कम या शून्य है, तो निष्ठा कार्यक्रम के के.आर.पी. सदस्यों या अनुभवी विशेषज्ञ शिक्षकों को संदर्भदाता के रूप में नामित किया जाएगा।

  • चयन मापदंड: संदर्भदाताओं के चयन में यह ध्यान रखा जाएगा कि उनके अपने मूल विद्यालय में कम से कम 3 या अधिक शिक्षक/शिक्षा मित्र कार्यरत हों, ताकि उनके प्रशिक्षण में रहने के दौरान विद्यालय का पठन-पाठन सुचारू रूप से चलता रहे।

  • विधि: व्याख्यान के स्थान पर 'करके सीखने' (Learning by Doing) और मॉक सत्रों (अभ्यास सत्रों) पर विशेष जोर दिया जाएगा।

​2. ब्लॉक स्तर पर प्राथमिक शिक्षकों व शिक्षा मित्रों का मुख्य प्रशिक्षण

  • समय सारिणी: जुलाई के द्वितीय सप्ताह से शुरू होकर सितंबर 2026 तक यह प्रशिक्षण चलेगा।

  • बैच व्यवस्था: प्रत्येक बी.आर.सी./यू.आर.सी. पर अलग-अलग प्रशिक्षण हॉल में एक साथ दो बैचों में प्रशिक्षण संचालित होगा, जिसमें एक बैच में अधिकतम 50 शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

  • समय: प्रशिक्षण सत्र प्रतिदिन प्रातः 9:30 बजे से सायं 5:00 बजे तक चलेंगे, जिसमें चाय व भोजनावकाश के लिए 45 मिनट का समय निर्धारित है।

  • सहायता प्राप्त स्कूल: परिषदीय शिक्षकों/शिक्षामित्रों के साथ-साथ अशासकीय सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालयों के भी गणित और हिंदी विषय के एक-एक शिक्षक को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग करने हेतु निर्देशित किया गया है।

​स्मार्ट क्लासरूम और हाई-टेक ऑनलाइन मॉनिटरिंग

​प्रशिक्षण सत्रों को पूरी तरह पारदर्शी और उच्च गुणवत्तायुक्त बनाए रखने के लिए इस बार अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। राज्य परियोजना कार्यालय, लखनऊ तथा सीमैट (SIEMAT), प्रयागराज के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण का ऑनलाइन अनुश्रवण किया जाएगा:

  1. हाई-रिजोल्यूशन वेब कैमरे: बी.आर.सी. के प्रत्येक प्रशिक्षण कक्ष में कंप्यूटर/लैपटॉप सिस्टम से जुड़ा एक हाई-रिजोल्यूशन वेब कैमरा पीछे की दीवार पर लगाया जाएगा, जिससे कक्ष की समस्त गतिविधियां स्पष्ट रूप से देखी जा सकें।

  1. माइक और साउंड सिस्टम: संदर्भदाताओं द्वारा माइक साउंड सिस्टम या ब्लूटूथ कॉलर माइक का प्रयोग अनिवार्य किया गया है ताकि राज्य स्तर पर बैठे अनुश्रवणकर्ताओं को संदर्भदाता की आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई दे।

  1. हाई-स्पीड इंटरनेट: बिना किसी तकनीकी रुकावट के ऑनलाइन लाइव मॉनिटरिंग के लिए सभी केंद्रों पर हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी की सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा इसके लिए लाइव प्रशिक्षण लिंक जनरेट कर दो दिन पहले राज्य कार्यालय को भेजा जाएगा।

​वित्तीय आवंटन और निर्देश

​राज्य सरकार ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए कुल ₹5273.47156 लाख (बावन करोड़ तिहत्तर लाख सैंतालिस हजार एक सौ छप्पन रुपये मात्र) की भारी-भरकम धनराशि की लिमिट जनपदों को जारी कर दी है।

  • प्रतिभागियों को भत्ता (DBT): डायट स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स को ₹300 प्रति दिवस तथा ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण पाने वाले प्रत्येक शिक्षक/शिक्षा मित्र को ₹200 प्रति दिवस (कुल ₹1000) की दर से जलपान व लंच हेतु धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में बैच समाप्ति के 3 दिनों के भीतर ट्रांसफर की जाएगी।

  • स्टेशनरी किट: इसके अतिरिक्त चार्ट पेपर, मार्कर, टेप, पेन, राइटिंग पैड और फोल्डर आदि के लिए डायट स्तर पर प्रति प्रतिभागी ₹200 तथा ब्लॉक स्तर पर प्रति प्रतिभागी ₹100 की दर से बजट अलॉट किया गया है।

  • पारदर्शिता: इस बजट का पूरा रखरखाव और व्यय 'मैनुअल ऑन फाइनेंशियल मैनेजमेंट एंड प्रोक्योरमेंट 2024' के कड़े नियमों के तहत सीधे PFMS पोर्टल के माध्यम से ट्रैक किया जाएगा। निर्धारित अवधि में भुगतान न होने की स्थिति में जिला समन्वयक, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) का उत्तरदायित्व तय किया जाएगा।

​अनुश्रवण और जवाबदेही

​प्रशिक्षण की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कड़े प्रशासनिक मापदंड तय किए हैं:

  • उच्चाधिकारियों द्वारा निरीक्षण: जिलाधिकारियों (DM) और मुख्य विकास अधिकारियों (CDO) से इस पूरे कार्यक्रम की निरंतर समीक्षा और निरीक्षण करने का अनुरोध किया गया है। इसके साथ ही मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) प्रत्येक माह मण्डल के कम से कम तीन विकासखण्डों का निरीक्षण करेंगे।

  • अनुपस्थिति पर कार्रवाई: यदि प्रशिक्षण के दौरान कोई शिक्षक या शिक्षामित्र अनधिकृत रूप से अनुपस्थित पाया जाता है, तो इसके लिए संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को उत्तरदायी माना जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई होगी।

  • शिक्षकों से फीडबैक: राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए ऑनलाइन लिंक पर शिक्षकों द्वारा संदर्भदाताओं, प्रशिक्षण सामग्री तथा भौतिक वातावरण के संबंध में फीडबैक प्रदान किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की सुधार प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

  • सतत अभ्यास: प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मुख्य सत्रों का अभ्यास और विचार-विमर्श हर महीने होने वाली 'शिक्षक संकुल' की मासिक बैठकों में भी कराया जाएगा, जिससे शिक्षक पूरे साल इन तकनीकों का सही अनुप्रयोग क्लासरूम में कर सकें।

​यह व्यापक पहल और तकनीकी रूप से सुसज्जित प्रशिक्षण ढांचा निश्चित रूप से आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की सूरत बदलने तथा प्राथमिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता को एक नई ऊंचाई देने में मील का पत्थर साबित होगा। 

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