लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सहकारी बैंक कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने कर्मचारियों के वर्षों से लंबित पड़े वेतन पुनरीक्षण (Wage Revision) की मांग को आखिरकार मंजूरी दे दी है। यह अहम फैसला सोमवार को लखनऊ स्थित स्टेट कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड मुख्यालय के सभागार में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर ने की।
इन जिलों के बैंक कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, नवीन लाइसेंस प्राप्त जिला सहकारी बैंकों को दो श्रेणियों में बांटकर वेतनमान देने का फैसला किया गया है:
- 30 वर्ष से लंबित मामले (6 बैंक): बहराइच, बलिया, सुल्तानपुर, जौनपुर, सिद्धार्थनगर और हरदोई के जिला सहकारी बैंकों में पिछले 3 दशकों से वेतन पुनरीक्षण नहीं हुआ था। अब इन्हें वर्ष 2011 का वेतनमान दिया जाएगा।
- 20 वर्ष से लंबित मामले (8 बैंक): देवरिया, गाजीपुर, वाराणसी, सीतापुर, अयोध्या, फतेहपुर, आजमगढ़ और गोरखपुर के जिला सहकारी बैंकों में भी 20 से अधिक वर्षों से यह मामला अटका था। इन्हें भी वर्ष 2011 का वेतनमान देने का निर्णय लिया गया है।
अन्य 34 बैंकों के लिए क्या हैं शर्तें?
बैठक के दौरान सहकारिता विभाग ने यह भी साफ किया कि प्रदेश के अन्य 34 जिला सहकारी बैंकों के कर्मचारियों को भी वेतन पुनरीक्षण का लाभ दिया जाएगा। हालांकि, इसके लिए बैंकों को नाबार्ड (NABARD) द्वारा निर्धारित आवश्यक मानकों और गाइडलाइंस को पूरा करना होगा। जैसे ही ये बैंक तय मानकों को पूर्ण कर लेंगे, इनके कर्मचारियों के लिए भी लाभ का रास्ता साफ हो जाएगा।
सहकारिता मंत्री के इस फैसले से सालों से वित्तीय विसंगतियों का सामना कर रहे हजारों बैंक कर्मचारियों में खुशी की लहर है।


