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यूपी में 'शिक्षा का अधिकार' मजबूत करने की कवायद: 25 जून तक होगी आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान, शिक्षा विभाग ने कसी कमर

Sir Ji Ki Pathshala 0

उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के हर बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए मिशन मोड में नजर आ रही है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की औपचारिक शुरुआत से पहले, बेसिक शिक्षा विभाग ने राज्य में 'आउट ऑफ स्कूल' (स्कूल से बाहर रह गए) बच्चों को चिह्नित करने के लिए एक विशेष सर्वेक्षण अभियान शुरू किया है। राज्य परियोजना निदेशक की ओर से सभी जिलों के जिला समन्वयकों और शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके तहत आगामी 25 जून तक ऐसे सभी बच्चों का डेटाबेस तैयार कर रिपोर्ट विभाग को सौंपनी होगी।

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घर-घर पहुंचेगा सर्वे: प्रधानाचार्यों और समन्वयकों को मिली कमान

​विभाग द्वारा जारी गाइडलाइंस के मुताबिक, इस अभियान को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और स्थानीय शिक्षकों की मदद ली जाएगी। सर्वे टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल बच्चों की संख्या ही नहीं, बल्कि उनकी पूरी पृष्ठभूमि का विवरण जुटाएं।

मुख्य बिंदु:

  • नया शैक्षणिक सत्र (2026-27): सत्र की शुरुआत से पहले बेसिक शिक्षा विभाग पूरी तरह सक्रिय।
  • अंतिम तिथि: सभी जिलों को सर्वे पूरा कर 25 जून तक सौंपनी होगी विस्तृत रिपोर्ट।
  • मुख्य फोकस: बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले (ड्रॉपआउट) और कभी स्कूल न जाने वाले बच्चों को मुख्यधारा में लाना।
  • रणनीति: राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और जिला समन्वयकों को सौंपी गई जिम्मेदारी।

सर्वेक्षण के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित जानकारियां एकत्र की जाएंगी:

  • ​बच्चे का नाम, स्थायी पता और सटीक आयु।
  • ​बच्चे की वर्तमान शैक्षिक स्थिति (वह किस कक्षा तक पढ़ा है या कभी स्कूल गया ही नहीं)।
  • सबसे महत्वपूर्ण: विद्यालय न जाने या पढ़ाई बीच में ही छोड़ देने (ड्रॉपआउट) के वास्तविक और ठोस कारण।

ड्रॉपआउट के कारणों पर विशेष नजर: बाल श्रम और पलायन पर वार

​शिक्षा विभाग का मानना है कि केवल नामांकन बढ़ाना काफी नहीं है, बल्कि उन कारणों की जड़ तक पहुंचना जरूरी है जिसकी वजह से बच्चे स्कूल से दूर हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश में आर्थिक तंगी, पारिवारिक परिस्थितियां, माता-पिता का रोजगार के लिए पलायन, बाल श्रम और कुछ सामाजिक रूढ़ियां बच्चों की पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा बनती हैं।

विभाग का दृष्टिकोण: समय रहते यदि इन बच्चों की पहचान कर ली जाए और उनके अभिभावकों की काउंसलिंग की जाए, तो उन्हें आसानी से दोबारा स्कूल की चौखट तक लाया जा सकता है। इससे न सिर्फ नए दाखिले बढ़ेंगे, बल्कि बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की दर (ड्रॉपआउट रेट) में भी भारी कमी आएगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और RTE को धरातल पर उतारने का प्रयास

​यह विशेष अभियान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत देश के हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा देने के संकल्प का हिस्सा है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सत्र शुरू होने से पहले इस तरह का व्यापक सर्वे एक दूरदर्शी कदम है। इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का सटीक डेटा सामने आएगा, बल्कि सरकार को नई कल्याणकारी योजनाएं और ब्रिज कोर्स तैयार करने में भी मदद मिलेगी।

नए सत्र में दिखेगा बदलाव

​बेसिक शिक्षा विभाग को पूरी उम्मीद है कि 25 जून तक मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर एक मजबूत कार्ययोजना (Action Plan) तैयार की जाएगी। इसके बाद नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही चिह्नित किए गए सभी बच्चों का दाखिला सरकारी विद्यालयों में कराया जाएगा। सरकार की इस मुस्तैदी से साफ है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में छात्रों की संख्या और शिक्षा के स्तर में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

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