नई दिल्ली: भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और पर्यावरण अनुकूल ईंधन (Green Fuel) को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। सरकार ने 22% से लेकर 30% तक एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल (E22, E25, E27 और E30) को एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) से पूरी तरह मुक्त कर दिया है। सरकार के इस कदम से साफ है कि भारत अब E20 (20% एथेनॉल) के सफल क्रियान्वयन के बाद, बहुत जल्द E30 ईंधन की दिशा में कदम बढ़ाने जा रहा है।
BIS ने तय किए नए स्टैंडर्ड, 15 मई से नियम लागू
उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले इस ईंधन को बाजार में उतारने के लिए तकनीकी तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने इन नए फ्यूल ग्रेड्स के लिए कड़े क्वॉलिटी स्टैंडर्ड (गुणवत्ता मानक) जारी किए हैं, जो 15 मई 2026 से प्रभावी हो चुके हैं। इन नए मानकों में:
- एथेनॉल का सटीक प्रतिशत
- ऑक्टेन लेवल (इंजन की क्षमता बढ़ाने के लिए)
- सल्फर की मात्रा और वेपर प्रेशर (वाष्प दबाव)
- सुरक्षा से जुड़े कड़े मापदंड तय किए गए हैं।
सरकार एथेनॉल पर इतना जोर क्यों दे रही है?
भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है। अपनी जरूरत का करीब 80-85% कच्चा तेल हमें विदेशों से खरीदना पड़ता है, जिससे देश का एक बड़ा राजस्व बाहर चला जाता है। एथेनॉल को बढ़ावा देने के पीछे सरकार के तीन मुख्य लक्ष्य हैं:
- आर्थिक बचत: एथेनॉल का उत्पादन देश के भीतर होने से कच्चे तेल के आयात बिल में भारी कटौती होगी, जिससे अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचेगी।
- किसानों को सीधा फायदा: एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे (molasses) और क्षतिग्रस्त अनाज (जैसे मक्का और टूटे चावल) से बनता है। इससे गन्ना और अनाज उत्पादक किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम मिलेगा और उनकी आय बढ़ेगी।
- पर्यावरण संरक्षण: एथेनॉल एक स्वच्छ ईंधन है। पेट्रोल में इसका मिश्रण बढ़ने से गाड़ियों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन और हानिकारक गैसों में भारी कमी आती है।
चीनी उद्योग (Sugar Industry) को मिलेगा बूस्ट
इस फैसले का सबसे बड़ा सकारात्मक असर देश के शुगर सेक्टर पर देखने को मिलेगा। चीनी मिलें अब चीनी के अतिरिक्त स्टॉक को एथेनॉल उत्पादन में डाइवर्ट (परिवर्तित) कर सकेंगी। इससे मिलों की लिक्विडिटी (नकदी प्रवाह) बेहतर होगी और वे किसानों का गन्ना बकाया समय पर चुका पाएंगी।
आम उपभोक्ताओं पर क्या असर होगा? (चिंताएं और चुनौतियाँ)
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार के इस फैसले का आम उपभोक्ताओं पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं दिखेगा, क्योंकि ये उच्च मिश्रण वाले ईंधन अभी शुरुआती चरण में हैं। हालांकि, आने वाले समय में पेट्रोल पंपों पर इनकी उपलब्धता बढ़ेगी।
लेकिन उपभोक्ताओं के मन में कुछ व्यावहारिक चिंताएं भी हैं:
- माइलेज की कमी: एथेनॉल की ऊर्जा सघनता (energy density) शुद्ध पेट्रोल से कम होती है, जिससे गाड़ी के माइलेज में थोड़ी गिरावट आ सकती है।
- इंजन की सुरक्षा: अधिक एथेनॉल वाला ईंधन सामान्य इंजन के रबर पार्ट्स और पाइप्स को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके लिए गाड़ियों के इंजन को 'फ्लेक्स-फ्यूल इंजन' (Flex-Fuel Engine) या E30 कंपैटिबल बनाना होगा।
- रखरखाव लागत: पिछले साल आए एक सर्वे में उपभोक्ताओं ने हाई-एथेनॉल फ्यूल के कारण इंजन के रखरखाव (maintenance) के खर्च को लेकर भी आशंकाएं जताई थीं।


