लखनऊ। उत्तर प्रदेश के शिक्षा जगत से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों और मान्यता प्राप्त (अनुदानित एवं स्ववित्त पोषित) स्कूलों में कार्यरत लाखों शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोईयों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें कैशलेस चिकित्सा सुविधा का बड़ा तोहफा दिया है। अब ये सभी कर्मी और उनके आश्रित परिवार के सदस्य सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी मुफ्त इलाज करा सकेंगे।
इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को निर्देश जारी कर दिए हैं। योजना के सफल संचालन के लिए 4 जून 2026 को लखनऊ में एक विशेष प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
इन सभी कर्मियों और उनके परिवारों को मिलेगा लाभ
सरकार द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार, इस कैशलेस चिकित्सा सुविधा के दायरे में निम्नलिखित लोगों को शामिल किया गया है:
- बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों के शिक्षक।
- मान्यता प्राप्त अनुदानित (Aided) एवं स्ववित्त पोषित (Self-Financed) स्कूलों के शिक्षक।
- शिक्षामित्र और अनुदेशक।
- विशेष शिक्षक (CWSN/CWCN)।
- कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में कार्यरत वार्डेन, पूर्णकालिक और अंशकालिक शिक्षक/शिक्षिकाएं।
- प्रधानमंत्री पोषण योजना (मध्यान्ह भोजन) के अंतर्गत कार्यरत रसोईये।
- आश्रित परिवार: उपर्युक्त सभी कर्मियों के आश्रित परिवार के सदस्यों को भी इस योजना का पूरा लाभ मिलेगा।
योजना की मुख्य बातें और शर्तें
1. अस्पताल और इलाज की दरें
यह सुविधा केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं होगी। लाभार्थी कर्मचारी साचीज (SACHIS) के साथ सम्बद्ध निजी चिकित्सालयों (Private Hospitals) के आई०पी०डी० (अंतरोंगी विभाग/Admit होने पर) में भी कैशलेस उपचार करा सकेंगे। इलाज की दरें वही होंगी जो प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभिकरण (NHA) द्वारा तय की गई हैं।
2. प्रति कर्मचारी ₹3000 अनुमानित प्रीमियम
योजना के तहत प्रति कार्मिक ₹3000 वार्षिक प्रीमियम का अनुमान लगाया गया है, जिसका पूरा भुगतान बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा वास्तविक व्ययभार के अनुसार किया जाएगा। यह प्रीमियम केवल वर्तमान में कार्यरत और पात्र शिक्षकों/कर्मियों के लिए ही देय होगा।
3. 'साचीज' करेगी योजना का संचालन
इस पूरी योजना का क्रियान्वयन State Agency For Comprehensive Health and Integrated Services (साचीज) के माध्यम से कराया जा रहा है। सभी लाभार्थियों का डेटाबेस तैयार कर हर साल 30 जून तक साचीज के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) को उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे नए नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।
4. किन्हें नहीं मिलेगा लाभ?
ऐसे कर्मचारी या शिक्षक जो पहले से ही केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य स्वास्थ्य योजना (जैसे- प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना या मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान आदि) का लाभ ले रहे हैं, उन्हें इस योजना के तहत कवर नहीं किया जाएगा।
5. वित्तविहीन स्कूलों के लिए अलग से आदेश
चूंकि वित्तविहीन (Self-Financed) विद्यालयों के शिक्षकों का कोई प्राधिकृत (Official) डेटा वर्तमान में विभाग के पास उपलब्ध नहीं है, इसलिए उनके चिन्हांकन के लिए सरकार अलग से एक कार्यकारी आदेश जारी करेगी।
4 जून को लखनऊ में प्रशिक्षण
शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने पत्र जारी कर बताया है कि योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए 4 जून 2026 को दोपहर 12:00 बजे से शिक्षा निदेशक (बेसिक) के शिविर कार्यालय, लखनऊ में एक महत्वपूर्ण ट्रेनिंग आयोजित की गई है।
सभी जनपदों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने जिले से संबंधित एक कार्मिक को 'नोडल अधिकारी' नामित करें। इन नोडल अधिकारियों को लैपटॉप और आवश्यक डेटा के साथ इस प्रशिक्षण में समय से प्रतिभाग करना अनिवार्य होगा, जहाँ 'साचीज' की तकनीकी टीम उन्हें इस सिस्टम को चलाने की ट्रेनिंग देगी।
विभाग का संदेश: अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा और शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शिक्षकों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य से जुड़ी इस बेहद महत्वपूर्ण योजना को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में कर्मचारियों को तत्काल कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सके।


