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लोन चुकाने के बाद बैंक नहीं रख सकता मकान के कागजात, इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

Sir Ji Ki Pathshala 0

प्रयागराज। बैंकों द्वारा लोन चुकता होने के बाद भी संपत्ति के दस्तावेज दबाकर बैठने की मनमानी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक महत्वपूर्ण फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि बैंक का पूरा लोन चुका दिया गया है, तो बैंक को बंधक रखे गए दस्तावेजों को अपने पास रोके रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

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​न्यायालय ने इस मामले में बैंक ऑफ इंडिया को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि वह याचिकाकर्ता के मकान का मूल बैनामा (Sale Deed) और अन्य संबंधित दस्तावेज दो सप्ताह के भीतर वापस करे। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने गाजियाबाद की निवासी सीमा जैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

​क्या है पूरा मामला?

​याचिकाकर्ता सीमा जैन के पक्ष में अदालत के समक्ष अधिवक्ता रजत ऐरेन और राज कुमार सिंह ने दलीलें पेश कीं। मामले की कड़ियाँ कुछ इस प्रकार हैं:

  • 2002 (मकान की खरीद): सीमा जैन ने वर्ष 2002 में गाजियाबाद में एक मकान खरीदा था। खरीदारी के बाद उन्होंने नगर निगम में इसका विधिवत नामान्तरण (Mutation) भी करवा लिया था।
  • 2012 (बैंक का नोटिस): मकान में करीब 10 साल शांति से रहने के बाद, 2012 में बैंक ऑफ इंडिया ने उन्हें एक नोटिस थमाया। इस नोटिस ने उनके होश उड़ा दिए।
  • लोन की देनदारी: बैंक के अनुसार, इस मकान की पूर्व मालकिन ने अपने बेटे के 5 लाख रुपये के लोन के लिए इस संपत्ति को गारंटर के तौर पर बैंक में बंधक रखा था।
  • 22 लाख का पहाड़: बेटे द्वारा लंबे समय तक लोन न चुकाए जाने के कारण ब्याज समेत यह देनदारी बढ़कर 22 लाख रुपये से अधिक हो चुकी थी। बैंक ने चेतावनी दी थी कि लोन न चुकाने पर मकान को जब्त कर लिया जाएगा।

​कोर्ट का रुख और फैसला

​मामले की गंभीरता और कानूनी पहलुओं को देखते हुए हाईकोर्ट ने माना कि लोन की अदायगी (या संबंधित कानूनी प्रक्रिया) पूरी होने के बाद बैंक का दस्तावेजों पर कोई हक नहीं रह जाता। अदालत ने बैंक की इस हीला-हवाली को गलत माना और साफ किया कि बैंक उपभोक्ताओं के हक को इस तरह नहीं मार सकते।

कोर्ट का आदेश: बैंक ऑफ इंडिया याचिकाकर्ता के मकान के बैनामा सहित सभी आवश्यक कागजात दो सप्ताह के भीतर हर हाल में सुपुर्द करे।

​क्यों अहम है यह फैसला?

​यह फैसला उन हजारों बैंक उपभोक्ताओं और संपत्ति खरीदारों के लिए एक नजीर साबित होगा, जिन्हें लोन चुकता होने के बाद भी अपने ही मकान या जमीन के कागजात (Title Deeds) वापस पाने के लिए बैंक के चक्कर काटने पड़ते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि लोन खत्म, तो बंधक का अधिकार भी खत्म।

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