Type Here to Get Search Results !

बेसिक शिक्षा विभाग घोटाला: एक ही स्कूल को 3 बार भेजी ग्रांट, जिला समन्वयक ललित वर्मा फंसे

Sir Ji Ki Pathshala

पीलीभीत। माध्यमिक शिक्षा विभाग में चपरासी इल्हाम उर्फ रहमान शम्सी के 50 करोड़ के चर्चित घोटाले की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब बेसिक शिक्षा विभाग में भी सरकारी धन के बंदरबांट का एक बड़ा खेल सामने आया है। समग्र शिक्षा योजना के तहत एक ही विद्यालय को नियम ताक पर रखकर तीन-तीन बार ग्रांट जारी कर दी गई। शुरुआती जांच में 2,13,300 रुपये (दो लाख तेरह हजार तीन सौ रुपये) की वित्तीय अनियमितता उजागर होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।

pilibhit-basic-shiksha-vibhag-ghotala-lalit-verma.jpg

​इस पूरे मामले में समग्र शिक्षा के जिला समन्वयक (निपुण) / सहायक लेखाकार ललित वर्मा मुख्य आरोपी के रूप में घिर गए हैं, जिनके खिलाफ अब कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

​कैसे हुआ सरकारी धन का बंदरबांट? (घोटाले का तरीका)

​जांच और अभिलेखों के अवलोकन से पता चला है कि जिला समन्वयक ललित वर्मा के पटल से नियमों के विपरीत जाकर एक ही विद्यालय को विभिन्न मदों में बार-बार धनराशि ट्रांसफर की गई। जिन विद्यालयों को ग्रांट नहीं भेजी जानी थी, उन्हें भी पैसे जारी कर दिए गए:

  • कम्पोजिट ग्रांट: एक ही विद्यालय को 22,000 रुपये की कम्पोजिट ग्रांट तीन बार में कुल 66,000 रुपये भेज दी गई।
  • स्मार्ट क्लासरूम एवं आईसीटी लैब: इसी विद्यालय को स्मार्ट क्लासरूम और ICT लैब के नाम पर 1,33,500 रुपये का भुगतान कर दिया गया, जबकि वहां यह राशि भेजी ही नहीं जानी थी।
  • टीएलएम (TLM) मद: इसी स्कूल को 4,600 रुपये की टीएलएम ग्रांट भी तीन बार में कुल 13,800 रुपये ट्रांसफर की गई।

​प्रथम दृष्टया यह पूरी वित्तीय गड़बड़ी ललित वर्मा के "वित्तीय स्वार्थ" और "संदिग्ध कार्यशैली" को दर्शाती है।

​अधिकारियों का कड़ा रुख: मानदेय पर रोक और संविदा समाप्ति का नोटिस

​मामला सामने आते ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) रोशनी सिंह ने त्वरित एक्शन लिया है:

बीएसए रोशनी सिंह का बयान:"मामला संज्ञान में आते ही ललित वर्मा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, लेकिन उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिला। लिहाजा, उन्हें दूसरा नोटिस भेजा जा रहा है। फिलहाल उनके मानदेय (सैलरी) आहरण पर रोक लगा दी गई है। उनसे पूछा गया है कि क्यों न इस धनराशि की वसूली उनसे की जाए और उनकी संविदा समाप्त कर दी जाए? हालांकि, गलत तरीके से भेजी गई धनराशि की रिकवरी (वसूली) कर ली गई है।"

​बीएसए ने आरोपी कर्मचारी को दो दिन के भीतर उचित साक्ष्यों के साथ अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का अंतिम मौका दिया है। यदि तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उनकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी।

​जिलाधिकारी की चेतावनी: संलिप्त लोगों पर दर्ज होगी FIR

​इस गंभीर घोटाले पर जिलाधिकारी (DM) ज्ञानेन्द्र सिंह ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के इस खेल में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

  • कड़ी कार्रवाई के निर्देश: डीएम ने बीएसए को संबंधित कर्मचारियों पर तत्काल विभागीय और विधिक कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए हैं।
  • बढ़ेगा जांच का दायरा: विभाग के जानकारों का मानना है कि यह घोटाला सिर्फ एक स्कूल या कम्पोजिट ग्रांट तक सीमित नहीं है। गहराई से जांच होने पर कई और बड़े घपले सामने आ सकते हैं।
  • होगी एफआईआर: जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट आते ही इस मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी।

​इस खुलासे के बाद से बेसिक शिक्षा विभाग के अन्य कर्मचारियों और पटल प्रभारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है। देखना यह है कि जांच की आंच और कितने लोगों तक पहुंचती है।