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15 वर्षों से अपनों से दूर महिला शिक्षिकाओं ने स्थानांतरण के लिए बेसिक शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन

Sir Ji Ki Pathshala 0

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आकांक्षी और पिछड़े जनपदों में तैनात महिला शिक्षकों के सब्र का बांध अब टूटता नजर आ रहा है। वर्षों से अपने घर-परिवार और बच्चों से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहकर सेवा दे रही इन शिक्षिकाओं ने अब अपनी घर वापसी के लिए मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ की ओर से प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुलोचना मौर्य के नेतृत्व में माननीय बेसिक शिक्षा मंत्री श्री संदीप सिंह को एक ज्ञापन सौंपा गया।

15 साल का लंबा इंतजार, अब तक समाधान नहीं

​ज्ञापन के माध्यम से यह दर्द साझा किया गया कि प्रदेश की हजारों महिला शिक्षिकाएं पिछले 15 वर्षों या उससे अधिक समय से अपने मूल जनपद से दूर आकांक्षी जिलों में कार्यरत हैं। शिक्षिकाओं का कहना है कि स्थानांतरण की प्रक्रिया कई बार शुरू तो हुई, लेकिन कभी कानूनी अड़चनों (कोर्ट केस) तो कभी विभागीय सुस्ती के कारण वे इसका लाभ पाने से वंचित रह गईं।

मानसिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना

​शिक्षिकाओं ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि परिवार और बच्चों से दूर रहने के कारण वे गंभीर मानसिक तनाव और पारिवारिक विघटन जैसी स्थितियों से जूझ रही हैं। ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया गया कि जब देश की संसद 'महिला आरक्षण' और 'महिला सशक्तिकरण' जैसे विषयों पर चर्चा कर रही है, ऐसे में शिक्षिकाओं की यह बुनियादी समस्या अब भी अनसुलझी है।

प्रमुख मांगें और आग्रह

​उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ ने सरकार से निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग की है:

  • विशेष स्थानांतरण योजना: आकांक्षी एवं पिछड़े जनपदों में लंबे समय से जमी महिला शिक्षकों के लिए एक विशेष प्राथमिकता वाली ट्रांसफर पॉलिसी लागू की जाए।
  • मूल जनपद में वापसी: वरिष्ठता और पारिवारिक परिस्थितियों को आधार बनाकर उन्हें उनके गृह जनपद में पदस्थापित किया जाए।
  • पारिवारिक संतुलन: शिक्षिकाओं के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक स्थिरता के लिए जल्द से जल्द स्थानांतरण प्रक्रिया पूर्ण की जाए।

भविष्य की उम्मीद

​ज्ञापन की प्रति माननीय मुख्यमंत्री जी को भी सूचनार्थ प्रेषित की गई है। महिला शिक्षकों को उम्मीद है कि योगी सरकार उनके प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए इस 'वनवास' को समाप्त करेगी। शिविर कार्यालय लखनऊ से जारी इस मांग पत्र के बाद अब प्रदेश भर की शिक्षिकाओं की निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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