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दिल्ली के रामलीला मैदान में शिक्षकों का हुंकार: टीईटी (TET) अनिवार्यता के खिलाफ देशभर के 20 लाख शिक्षकों ने खोला मोर्चा

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली/लखनऊ: देश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लाखों शिक्षकों के भविष्य पर मंडरा रहे टीईटी (TET) की अनिवार्यता के संकट ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। 'टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया' (TFI) के आह्वान पर दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में देशभर से आए हजारों शिक्षकों ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।

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​उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से आए शिक्षकों की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय को केंद्र सरकार कानून बनाकर रोके, ताकि पुराने शिक्षकों की नौकरी पर आंच न आए।

​पुराने शिक्षकों पर जीविकोपार्जन का संकट

​रैली को संबोधित करते हुए टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि वर्ष 2011 से पूर्व भर्ती हुए शिक्षकों पर अब टीईटी (TET) पास करने का दबाव बनाना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि:

  • रिटायरमेंट की कगार पर शिक्षक: बहुत से शिक्षक अपनी सेवा के अंतिम पड़ाव पर हैं। इस उम्र में उनसे पात्रता परीक्षा पास करने की उम्मीद करना उनके साथ अन्याय है।
  • लाखों परिवारों पर असर: इस अनिवार्यता से देश भर के लगभग 20 लाख और अकेले उत्तर प्रदेश के 1.86 लाख शिक्षकों की नौकरी और जीविकोपार्जन पर सीधा संकट खड़ा हो गया है।

​सरकार से 'कानून' बनाने की मांग

​शिक्षकों का स्पष्ट कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से उत्पन्न हुई इस स्थिति को केवल केंद्र सरकार ही संभाल सकती है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि संसद में कानून बनाकर पुराने शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी छूट दी जाए। रैली में सांसद जगदंबिका पाल ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे शिक्षकों को अपनी बात सरकार तक पहुँचाने की उम्मीद जगी है।

​आंदोलन में शामिल प्रमुख चेहरे

​रामलीला मैदान की इस विशाल रैली में शिक्षा जगत की कई बड़ी हस्तियों ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रमुख हैं:

  • ​एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी
  • ​पूर्व एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी
  • ​राममूर्ति ठाकुर, संजय मिश्रा, योगेश त्यागी
  • ​शिवशंकर पांडेय और राधेरमण त्रिपाठी

​शिक्षकों का तर्क: अनुभव ही सबसे बड़ी योग्यता

​शिक्षकों का मानना है कि जो अध्यापक पिछले 15-20 वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, उनका अनुभव ही उनकी सबसे बड़ी योग्यता है। 2011 के बाद भर्ती होने वालों के लिए टीईटी अनिवार्य करना सही हो सकता है, लेकिन पुराने शिक्षकों को इस दायरे में लाना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

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