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डिजिटल जनगणना 2026: 'नो लोकल स्टोरेज' और 6-लेयर सुरक्षा से सुरक्षित होगा नागरिकों का डेटा

Sir Ji Ki Pathshala 0

नई दिल्ली: भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना न केवल आधुनिक होगी, बल्कि सुरक्षा के मामले में अभेद्य भी होगी। केंद्र सरकार ने डेटा गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जनगणना की कार्यप्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव किया है। अब फील्ड में तैनात कर्मचारियों के मोबाइल फोन डेटा स्टोरेज का जरिया नहीं, बल्कि केवल एक माध्यम होंगे।

Digital Census Security Model

'नो लोकल स्टोरेज' मॉडल: डेटा लीक पर अंतिम प्रहार

​आमतौर पर मोबाइल ऐप्स में डेटा डिवाइस की मेमोरी में सेव होता है, लेकिन जनगणना के विशेष ऐप के लिए 'नो लोकल स्टोरेज' नीति अपनाई गई है।

  • तत्काल अपलोड: जैसे ही प्रगणक (Enumerator) जानकारी दर्ज करेगा, वह सीधे सरकारी सुरक्षित सर्वर पर चली जाएगी।
  • डिवाइस में शून्य रिकॉर्ड: डेटा प्रविष्टि के बाद मोबाइल या टैबलेट में नागरिकों की कोई भी जानकारी शेष नहीं रहेगी।
  • सुरक्षित सिंकिंग: यदि काम के दौरान इंटरनेट नहीं है, तो डेटा ऐप के भीतर एक एन्क्रिप्टेड अस्थायी बफर में रह सकता है, लेकिन नेटवर्क मिलते ही वह स्वतः सर्वर पर स्थानांतरित हो जाएगा और मोबाइल से मिट जाएगा।

सुरक्षा का अभेद्य किला: 6-लेयर प्रोटोकॉल

​डेटा की सेंधमारी रोकने के लिए सरकार ने सुरक्षा के 6 स्तर (Layers) निर्धारित किए हैं:

  1. प्रतिबंधित ट्रांसफर: ऐप से किसी भी अन्य डिवाइस या ब्लूटूथ/USB के जरिए डेटा साझा करना असंभव होगा।
  2. ऑथराइज्ड एक्सेस: केवल बायोमेट्रिक्स या टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन वाले पंजीकृत कर्मचारी ही लॉगिन कर सकेंगे।
  3. एन्क्रिप्टेड एंड-टू-एंड: डेटा एंट्री से लेकर सर्वर तक पहुँचने तक पूरी तरह कूटबद्ध (Encrypted) रहेगा।
  4. सीमित ऐप एक्सेस: फील्ड वर्कर केवल उन्हीं क्षेत्रों का डेटा देख पाएंगे जो उन्हें आवंटित हैं।
  5. क्लाउड सुरक्षा: अंतिम डेटा का भंडारण केवल उच्च-सुरक्षा वाले सरकारी क्लाउड सर्वर पर होगा।
  6. जीरो ट्रेंस पॉलिसी: डिवाइस चोरी होने या खो जाने की स्थिति में भी उसमें नागरिकों की निजी जानकारी नहीं खोजी जा सकेगी।

कार्ययोजना: 200 परिवार और डिजिटल लक्ष्य

​जनगणना की सुचारू प्रक्रिया के लिए एक विस्तृत ढांचा तैयार किया गया है:

  • कार्यभार: प्रत्येक कर्मचारी को औसतन 200 परिवारों के डेटा संग्रह की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  • दैनिक लक्ष्य: कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए रोजाना कम से कम 20 घरों का विवरण दर्ज करने का लक्ष्य है।
  • प्रशिक्षण: फरवरी में प्रस्तावित अगले चरण के लिए कर्मचारियों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

क्यों जरूरी था यह बदलाव?

​डिजिटल युग में नागरिकों की गोपनीयता (Privacy) सबसे बड़ी चिंता है। इस नई व्यवस्था से सरकार न केवल डेटा लीक और साइबर हमलों के खतरे को शून्य करना चाहती है, बल्कि जनगणना के परिणामों को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना चाहती है। डिजिटल मोड से कागज की बचत तो होगी ही, साथ ही डेटा प्रोसेसिंग की गति भी कई गुना बढ़ जाएगी।

निष्कर्ष: "नो लोकल स्टोरेज" और "6-लेयर सुरक्षा" जैसे कड़े कदम यह सुनिश्चित करते हैं कि भारत की डिजिटल जनगणना न केवल आधुनिक भारत की तस्वीर पेश करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर डेटा सुरक्षा के नए मानक भी स्थापित करेगी।

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