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UP शिक्षक समायोजन विवाद: हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरकार और BSA से माँगा जवाब

Sir Ji Ki Pathshala 0

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के समायोजन (Adjustment) की प्रक्रिया एक बार फिर कानूनी पेचीदगियों में फंसती नजर आ रही है। प्रथम चरण के समायोजन के तहत स्थानांतरित हुई एक शिक्षिका को पुनः मूल विद्यालय भेजने के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है।

​अदालत ने इस मामले में प्रथम दृष्टया अनियमितता पाते हुए राज्य सरकार और संबंधित बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) से जवाब तलब किया है।

क्या है पूरा मामला?

​विवाद की जड़ें 30 जून 2025 को हुए प्रथम चरण के समायोजन से जुड़ी हैं:

  • स्थानांतरण: एक शिक्षिका का स्थानांतरण प्रथम समायोजन प्रक्रिया के तहत नियमानुसार किया गया था।
  • वापसी का आदेश: द्वितीय चरण के समायोजन के दौरान विभाग द्वारा उक्त शिक्षिका को वापस उनके पुराने (मूल) विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए।
  • कानूनी चुनौती: शिक्षिका ने इस 'वापसी आदेश' को मनमाना बताते हुए हाई कोर्ट की एकल पीठ (Single Bench) में चुनौती दी, लेकिन वहां से उनकी याचिका खारिज कर दी गई।

डिवीजन बेंच में अपील और कोर्ट का रुख

​एकल पीठ के फैसले से असंतुष्ट होकर शिक्षिका ने डिवीजन बेंच में स्पेशल अपील दाखिल की।

कोर्ट की टिप्पणी: मामले की सुनवाई के दौरान माननीय खंडपीठ ने प्रथम चरण के स्थानांतरण के बाद दोबारा मूल विद्यालय भेजने की प्रक्रिया में कानूनी विसंगति और अनियमितता की संभावना जताई। कोर्ट ने माना कि यह मामला विस्तृत जांच और जवाब का हकदार है।

अगली सुनवाई 25 मार्च को

​हाई कोर्ट ने अब सरकार और विभाग को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को तय की गई है।

​यह आदेश उन हजारों शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जो समायोजन की विसंगतियों के कारण प्रभावित हुए हैं। यदि कोर्ट का निर्णय शिक्षिका के पक्ष में आता है, तो यह विभाग की स्थानांतरण और वापसी की नीति पर सवालिया निशान खड़ा कर सकता है।

UP शिक्षक समायोजन विवाद: हाई कोर्ट ने सरकार और BSA से मांगा जवाब

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