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बेटियों की सुरक्षा में 'द शैडो' का पहरा: यूपी के छात्रों ने विकसित किया सुरक्षा कवच

Sir Ji Ki Pathshala 0

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बेटियों की सुरक्षा और उनके शैक्षणिक विकास को डिजिटल युग के साथ जोड़ते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज (UPSIFS) के प्रतिभावान बीटेक छात्रों ने एक क्रांतिकारी मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया है, जिसका नाम ‘द शैडो’ (The Shadow) रखा गया है। यह ऐप न केवल छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि उनके शैक्षणिक प्रबंधन को भी पूरी तरह पारदर्शी बनाएगा।

The Shadow App for Girls Safety UPSIFS Lucknow

​नाम के अनुरूप ‘परछाईं’ की तरह काम करेगा ऐप

​यूपी एसआईएफएस के डिप्टी डायरेक्टर चिरंजीव मुखर्जी के अनुसार, इस ऐप को संस्थान के छात्र हर्ष और आदित्य मिश्रा ने असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नेहा सिंह के मार्गदर्शन में तैयार किया है। जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है, यह ऐप हर छात्रा के साथ उसकी परछाईं की तरह जुड़ा रहेगा और उनके हर मूवमेंट को अधिकृत तरीके से ट्रैक करेगा।

ऐप की मुख्य विशेषताएं:

  • डिजिटल गेट पास: कैंपस में प्रवेश और निकास के लिए क्यूआर-कोड आधारित सिस्टम।
  • एकेडमिक ट्रैकिंग: उपस्थिति, असाइनमेंट और परीक्षा के परिणाम एक ही प्लेटफॉर्म पर।
  • रियल-टाइम डेटा: संस्थान प्रशासन को छात्राओं की गतिविधियों की तत्काल जानकारी।

​'पैरेंट-फर्स्ट' और एसओएस: सुरक्षा के दोहरे मानक

​इस ऐप को अन्य साधारण ऐप्स से अलग बनाने वाली इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका ‘पैरेंट-फर्स्ट अप्रूवल सिस्टम’ है।

"यदि कोई छात्रा कैंपस से बाहर जाना चाहती है या किसी विशेष अवकाश के लिए अनुरोध करती है, तो संस्थान की अनुमति से पहले उसके अभिभावकों की डिजिटल मंजूरी अनिवार्य होगी।"

​इसके अलावा, आपात स्थिति के लिए इसमें एसओएस (SOS) इमरजेंसी सिस्टम दिया गया है। किसी भी प्रकार के खतरे का आभास होने पर, छात्रा को केवल एक बटन दबाना होगा। बटन दबते ही संस्थान प्रशासन और माता-पिता के पास तत्काल अलर्ट और लोकेशन पहुंच जाएगी, जिससे समय रहते मदद पहुंचाई जा सकेगी।

​पारदर्शिता और जिम्मेदारी का नया दौर

​इस डिजिटल पहल से अब छात्र, शिक्षक और अभिभावक एक ही सूत्र में बंध गए हैं। इससे न केवल कैंपस में अनधिकृत प्रवेश पर लगाम लगेगी, बल्कि छात्राओं की शैक्षणिक प्रगति की निगरानी भी आसान हो जाएगी। यूपी एसआईएफएस की यह पहल भविष्य में प्रदेश के अन्य संस्थानों के लिए भी एक रोल मॉडल साबित हो सकती है।

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