Type Here to Get Search Results !

'डोमिसाइल' नीति लागू करने की बढ़ती मांग, बाहरी राज्यों की तर्ज पर स्थानीय युवाओं को वरीयता देने की अपील

Sir Ji Ki Pathshala 0

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में आगामी शिक्षक भर्तियों (TGT, PGT, Assistant Professor और STET) को लेकर प्रतियोगी छात्रों ने एक नई मुहिम छेड़ दी है। छात्रों की मांग है कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अन्य राज्यों की तर्ज पर प्रदेश की भर्तियों में भी 'डोमिसाइल' नीति को कड़ाई से लागू करे, ताकि स्थानीय बेरोजगार युवाओं के हितों की रक्षा हो सके।

क्या है छात्रों की प्रमुख मांग?

​प्रतियोगी छात्र प्रतिनिधिमंडल (दिनेश यादव व अन्य) द्वारा आयोग को सौंपे गए पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्तियों के द्वार सभी राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए समान रूप से खुले होने के कारण स्थानीय छात्रों को कड़ी प्रतिस्पर्धा और 'दोहरे भेदभाव' का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों का तर्क है कि जब अन्य राज्य अपने निवासियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, तो उत्तर प्रदेश में ऐसा क्यों नहीं?

पड़ोसी राज्यों के उदाहरणों से तुलना

​छात्रों ने अपने दावे को मजबूत करने के लिए देश के विभिन्न राज्यों की आरक्षण व डोमिसाइल नीतियों का हवाला दिया है:

  • उत्तराखंड और छत्तीसगढ़: इन राज्यों में डोमिसाइल नीति पूरी तरह प्रभावी है, जिससे वहां की नियुक्तियों में स्थानीय निवासियों का दबदबा रहता है।
  • राजस्थान: यहाँ बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए कोटा बेहद सीमित (लगभग 5 प्रतिशत) रखा गया है।
  • बिहार और मध्य प्रदेश: बिहार में दूसरे राज्यों के लिए करीब 15 प्रतिशत की सीमा है, वहीं मध्य प्रदेश में भी स्थानीय निवासियों को विशेष लाभ मिलता है।

​"​जब पड़ोसी राज्यों में स्थानीय युवाओं के लिए सीटें सुरक्षित हैं, तो उत्तर प्रदेश के अभ्यर्थियों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों? हम चाहते हैं कि आगामी विज्ञापनों में उत्तर प्रदेश के मूल निवासियों को प्राथमिकता मिले।"

— दिनेश यादव, प्रतियोगी छात्र

    भविष्य की राह

    ​उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के समक्ष यह मांग अब एक बड़े विमर्श का रूप ले चुकी है। छात्रों का मानना है कि डोमिसाइल नीति लागू होने से न केवल प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था में स्थानीय परिवेश को समझने वाले शिक्षक भी शामिल होंगे।

    ​अब देखना यह है कि क्या शासन और आयोग आगामी विज्ञापनों में इन मांगों पर विचार कर नीति में कोई बड़ा बदलाव करते हैं या नहीं।

    UP TGT PGT Domicile Demand Letter to Education Commission

إرسال تعليق

0 تعليقات
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Bottom Post Ad