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टीईटी अनिवार्यता पर फिर भड़की आंदोलन की चिंगारी, शिक्षक संगठनों ने दी बड़े संघर्ष की चेतावनी

Sir Ji Ki Pathshala 0

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत लाखों शिक्षकों और केंद्र सरकार के बीच शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर ठन गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीईटी को अनिवार्य किए जाने के फैसले के बाद, शिक्षकों को उम्मीद थी कि केंद्र सरकार संसद के बजट सत्र में कोई बीच का रास्ता निकालकर उन्हें राहत देगी। लेकिन बजट सत्र खाली बीत जाने से शिक्षकों का धैर्य जवाब दे गया है, जिसके बाद अब प्रदेश भर में बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

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अनुभवी शिक्षकों में 'धोखे' का अहसास

​विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने सरकार के रुख पर कड़ा प्रहार किया है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आए 6 महीने बीत चुके हैं, लेकिन मंत्रालय ने राहत की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की।

"यह उन शिक्षकों के साथ सरासर अन्याय है जिन्होंने अपनी नियुक्ति के समय एनसीटीई (NCTE) द्वारा निर्धारित सभी मानकों को पूरा किया था। दशकों बाद नए नियम थोपना शिक्षकों के भविष्य से खिलवाड़ है।"

— संतोष तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष

मुख्य मांग: 2010 से पहले वालों को मिले छूट

​शिक्षक संगठनों का तर्क है कि जो शिक्षक 23 अगस्त 2010 (NCTE की गाइडलाइन लागू होने की तिथि) से पहले सेवा में आ चुके हैं, उन्हें इस परीक्षा से मुक्त रखा जाना चाहिए। प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान ने सवाल उठाया कि 20 से 25 साल की सेवा दे चुके वरिष्ठ शिक्षक अब करियर के इस पड़ाव पर परीक्षा में कैसे शामिल होंगे?

विरोध के मुख्य बिंदु:

    • पुराने नियम: नियुक्ति के समय की मान्य योग्यताओं को ही आधार माना जाए।
    • अनुभव का सम्मान: दशकों का शिक्षण अनुभव किसी भी पात्रता परीक्षा से बड़ा है।
    • सरकार की चुप्पी: बजट सत्र में राहत का कोई जिक्र न होने से नाराजगी।

आर-पार की लड़ाई का आह्वान

​शिक्षकों का गुस्सा सड़कों पर दिखने लगा है। जहाँ टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) ने केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री का पुतला फूंक कर विरोध दर्ज कराया, वहीं अब सभी शिक्षक और कर्मचारी संगठनों को एक मंच पर लाने की तैयारी है।

​संयुक्त मोर्चे के गठन के साथ ही जल्द ही एक 'महा-आंदोलन' की घोषणा की जाएगी। संगठनों का स्पष्ट संदेश है कि यदि सरकार ने नियमों में संशोधन नहीं किया, तो आगामी दिनों में शिक्षण कार्य ठप कर दिल्ली और लखनऊ में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

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