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अनुदेशकों को मिलेगा 17 हजार रुपये मानदेय, 2017 से बकाया एरियर के भुगतान का रास्ता साफ

Sir Ji Ki Pathshala 0

परिषदीय विद्यालयों में शिक्षण कार्य में जुटे अनुदेशकों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत भरी खबर आई है। एक लंबे कानूनी संघर्ष के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने अनुदेशकों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उन्हें 17,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने का आदेश दिया है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने वर्ष 2017 से लंबित एरियर के भुगतान का भी निर्देश दिया है, जिससे आर्थिक संकट से जूझ रहे अनुदेशकों के चेहरे खिल उठे हैं।

अनुदेशक मानदेय समाचार
अनुदेशक संघ के जिलाध्यक्ष प्रभाकर दुबे ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने वर्ष 2013 में परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए अनुदेशकों की भर्ती की थी। उस समय इनका मानदेय 7,000 रुपये तय किया गया था।
    • उतार-चढ़ाव का दौर: वर्ष 2017 में मानदेय में 1,470 रुपये की वृद्धि की गई, जिससे राशि 8,470 रुपये हो गई। हालांकि, बाद में विभाग ने इस बढ़ाोत्तरी को अनुचित मानते हुए बढ़ी हुई धनराशि की रिकवरी कर ली थी।
    • वर्तमान स्थिति: वर्ष 2022 में मानदेय बढ़ाकर 9,000 रुपये किया गया, लेकिन नियमानुसार अनुदेशक वर्ष 2017 से ही 17,000 रुपये मानदेय के हकदार थे।

​सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जिले में कार्यरत 201 अनुदेशकों को सीधा लाभ मिलेगा। संघ का कहना है कि ये अनुदेशक नियमित शिक्षकों के समान ही शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं, लेकिन कम वेतन के कारण उनके परिवार लंबे समय से आर्थिक तंगी का सामना कर रहे थे।

​न्यायालय ने अब स्पष्ट कर दिया है कि सभी पात्र अनुदेशकों को न केवल बढ़ा हुआ 17,000 रुपये मानदेय मिलेगा, बल्कि 2017 से अब तक का जो भी बकाया (एरियर) बनता है, उसका भुगतान भी सरकार को करना होगा।

​फैसले के बाद अनुदेशक संघ में जश्न का माहौल है। जिला महासचिव रवि कुमार, उपाध्यक्ष उदयवीर निरंजन, संजय वर्मा और महेंद्र यादव सहित अन्य पदाधिकारियों ने इसे "न्याय की जीत" बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इस फैसले से अनुदेशकों के जीवन स्तर में सुधार आएगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।

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