महत्त्वपूर्ण सूचना:
ब्रिजकोर्स के संबंध में NIOS ऑफिस से
साथियों,
आप सभी से सँयुक्त लीगल टीम ने वादा किया था कि शीतकालीन अवकाश में टीम के कुछ परिचित साथी NIOS के हेड ऑफिस नोएडा जाकर ब्रिज कोर्स के बारे में समस्त जानकारी प्राप्त करेंगे। उसी क्रम में आज टीम के परिचित साथियों द्वारा एनआईओएस ऑफिस में ब्रिज कोर्स से संबंधित अधिकारियों से प्रशिक्षण के बारे में अपने समस्त प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए गए, जो निम्न हैं—
🎯 1. सबसे पहला प्रश्न यह कि संस्कृत विषय का पेपर किस भाषा में लिखा जाएगा, तो इसका जवाब यह रहा कि जैसे आप लोगों ने अब तक संस्कृत का पेपर दिया था उसी तरह रहेगा। पैडागॉजी के प्रश्नों का उत्तर मिश्रित भाषा में लिखा जा सकता है। इसी क्रम में टीम द्वारा डी.एल.एड. में आने वाले संस्कृत के प्रश्न पत्र को भी एनआईओएस को उपलब्ध कराया गया।
🎯 2. टीम द्वारा सभी छह विषयों के मॉडल पेपर को स्टडी मटेरियल के साथ जारी करने की बात कही गई, जिस पर जवाब दिया गया कि यह कार्य अन्य लोगों द्वारा किया जाएगा। अतः आप हमें एक लेटर पर लिखकर दे दीजिए, हम इस लेटर को उस टीम को अवश्य दे देंगे।
🎯 3. ब्रिजकोर्स निर्देशिका में सप्लीमेंट्री स्टेज के बारे में NIOS द्वारा बताया गया कि किसी भी कारणवश (किसी भी स्तर पर एग्जाम में शामिल न हो पाए / उत्तीर्ण न हो पाए / या कोर्स के समस्त पेपर में भी शामिल न हो पाए हों) उस स्थिति में आप आवश्यक फीस भरने के बाद पुनः परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।
🎯 4. NIOS के अनुसार शीघ्र ही समस्त स्टडी मटेरियल आपके डैशबोर्ड पर अपलोड कर दिया जाएगा। साथ ही संस्कृत का पाठ्यक्रम भी आ जाएगा। और किसी भी स्तर पर समस्या आती है तो आप लोग NIOS टीम से संपर्क कर सकते हैं।
🎯 5. जिस भी साथी ने रजिस्ट्रेशन के दौरान पेमेंट फेल होने की दशा में पुनः पेमेंट कर दिया था और दो बार पेमेंट हो गया है, ऐसे अभ्यर्थी अपने पेमेंट का डिटेल और प्रत्यावेदन NIOS को मेल करेंगे, तो एक्स्ट्रा पेमेंट वापस कर दिया जाएगा। क्योंकि NIOS किसी भी कैंडिडेट से एक कोर्स का दो बार पेमेंट नहीं लेगा।
🎯 6. प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश स्तर पर अभी भी लगभग 783 फार्म प्रिंसिपल स्तर पर अप्रूव नहीं हुए हैं। तो ऐसे शिक्षक जिन्होंने अभी तक अपना फार्म प्रिंसिपल स्तर से अप्रूव नहीं कराया है, वे लोग अपना फॉर्म जल्द अप्रूव करवा लें। यह सूचना सभी साथियों तक अवश्य पहुंचाएं ताकि किसी भी साथी का अहित न हो सके।


