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जनगणना 2027: कानूनी मामलों में मान्य नहीं होंगे जनगणना दस्तावेज, केंद्र सरकार ने जारी किए स्पष्ट दिशा-निर्देश

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली। आगामी जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना से संबंधित किसी भी प्रकार का दस्तावेज या जानकारी किसी भी कानूनी, सिविल या आपराधिक मामले में साक्ष्य के रूप में मान्य नहीं होगी। इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय और प्रशासनिक उद्देश्यों तक सीमित रहेगा।

Census of India

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जनगणना के दौरान एकत्र की जाने वाली सूचनाएं पूरी तरह गोपनीय रहेंगी और इन्हें अदालतों में प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया जा सकेगा। यह प्रावधान जनगणना प्रक्रिया की निष्पक्षता और नागरिकों की गोपनीयता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।

अस्थायी अधिग्रहण का अधिकार

जनगणना कार्य को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए केंद्र सरकार को यह अधिकार भी दिया गया है कि वह आवश्यकता पड़ने पर किसी व्यक्ति के परिसर, भूमि या वाहन का सीमित अवधि के लिए अस्थायी अधिग्रहण कर सके। हालांकि इसके बदले संबंधित व्यक्ति को मौजूदा किराया या उचित मुआवजा प्रदान किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था केवल जनगणना कार्य तक ही सीमित रहेगी।

जनगणना अधिनियम 1948 के तहत अधिसूचना

जनगणना आयुक्त की ओर से इसी माह जनगणना अधिनियम 1948 के अंतर्गत अधिसूचना जारी की गई है। साथ ही भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के प्रावधानों के अनुसार भी यह स्पष्ट किया गया है कि जनगणना से जुड़े अभिलेखों को कानूनी साक्ष्य के दायरे से बाहर रखा जाएगा।

नियम उल्लंघन पर सख्त सजा

सरकार ने यह भी कहा है कि यदि कोई व्यक्ति जनगणना नियमों का उल्लंघन करता है या अधिग्रहित परिसर, भूमि अथवा वाहन पर अवैध कब्जा करता है, तो उसके खिलाफ एक वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है।

अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया

जनगणना कार्य के संचालन के लिए केंद्र सरकार द्वारा जनगणना आयुक्त, निदेशक, संयुक्त निदेशक, उप निदेशक और सहायक निदेशक की नियुक्ति की जाएगी। वहीं राज्यों में मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी तथा अन्य अधिकारी नियुक्त होंगे। जिला स्तर पर कलेक्टर, मजिस्ट्रेट या आयुक्त को प्रधान जनगणना अधिकारी बनाया जाएगा।

पारदर्शिता और सुरक्षा पर जोर

केंद्र सरकार का कहना है कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य जनगणना प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाना है, ताकि देश की जनसंख्या से संबंधित सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी आंकड़े तैयार किए जा सकें। सरकार ने नागरिकों से जनगणना में सहयोग करने की अपील भी की है।