अक्सर नेशनल हाईवे पर सफर करते समय कई बार हमारे FASTag का बैलेंस अचानक खत्म हो जाता है या ब्लैकलिस्ट हो जाता है। ऐसी स्थिति में टोल प्लाजा पर तैनात कर्मचारी आपसे दोगुना (200%) शुल्क वसूलते हैं, जिसे लेकर यात्रियों और टोल कर्मियों के बीच अक्सर विवाद होता है। हाल ही में बाराबंकी टोल पर हुई घटनाओं और सरकार के नवीनतम दिशा-निर्देशों के बाद अब नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
क्या है नया नियम?
भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के संज्ञान में यह बात आई है कि कई बार तकनीकी कारणों या जानकारी के अभाव में चालक दोगुना नकद भुगतान करने को मजबूर होते हैं। अब नई व्यवस्था के तहत:
- डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता: यदि आपके पास फास्टटैग बैलेंस नहीं है, तो आप UPI (GPay, PhonePe, Paytm) के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं।
- 1.25 गुना शुल्क का प्रावधान: पत्र और नियमों के नए संदर्भ के अनुसार, नकद (Cash) के रूप में दोगुना दंड देने के बजाय, ऑनलाइन माध्यम (UPI) से भुगतान करने पर आपको केवल 1.25 गुना (125%) धनराशि ही देनी होगी।
- उदाहरण: यदि किसी टोल की निर्धारित दर 100 रुपये है, तो बैलेंस न होने पर आपको 200 रुपये के बजाय सिर्फ 125 रुपये का भुगतान करना होगा।
यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश (राजपत्र संदर्भ)
चार पहिया वाहन चालकों और विशेषकर लंबी दूरी तय करने वालों के लिए निम्नलिखित बातें जानना आवश्यक है:
- UPI भुगतान से इनकार नहीं: टोल कर्मी आपको UPI से भुगतान करने से मना नहीं कर सकते। यदि वह नकद दोगुना मांगते हैं, तो आप उन्हें ऑनलाइन भुगतान का विकल्प दे सकते हैं।
- रसीद प्राप्त करें: किसी भी स्थिति में किए गए अतिरिक्त भुगतान की डिजिटल या भौतिक रसीद जरूर लें।
- विवाद से बचें: बाराबंकी की घटना के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि नियमों की सही जानकारी होने पर आप अनावश्यक आर्थिक नुकसान और विवाद से बच सकते हैं।
विशेष टिप: इस जानकारी की एक प्रति या संबंधित सरकारी आदेश का स्क्रीनशॉट अपने मोबाइल में सुरक्षित रखें ताकि जरूरत पड़ने पर आप टोल मैनेजर को दिखा सकें।
जनहित में जारी
यह जानकारी सभी कार चालकों और हाईवे यात्रियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। नियम की सही जानकारी ही आपका बचाव है।



