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सीटेट परीक्षा के लिए शिक्षकों को अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने की मांग तेज

Sir Ji Ki Pathshala 0

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने से उत्तर प्रदेश के बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। प्रदेश में लगभग 1.80 लाख शिक्षक इस निर्णय से प्रभावित बताए जा रहे हैं, जिनमें से कई शिक्षक आगामी 8 फरवरी को आयोजित होने वाली केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटेट) में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।

इन शिक्षकों ने प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक वर्ग के लिए आवेदन किया है, लेकिन परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए उन्हें संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (नो ऑब्जेक्शन) की आवश्यकता पड़ रही है। कई जिलों में यह प्रमाणपत्र समय पर जारी न होने से शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इस संबंध में उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने आवाज उठाई है। संघ का कहना है कि सीटेट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में शामिल होने के लिए सेवारत शिक्षकों को बेसिक शिक्षा विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना पड़ता है, लेकिन जिलास्तर पर इसमें अनावश्यक विलंब किया जा रहा है।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने बेसिक शिक्षा निदेशक से मांग की है कि इस विषय में एक सामूहिक आदेश जारी किया जाए, जिससे 8 फरवरी को होने वाली सीटेट परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक सभी सेवारत शिक्षकों को अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि समय रहते स्पष्ट आदेश जारी होने से शिक्षकों को मानसिक तनाव से राहत मिलेगी और परीक्षा में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।

शिक्षक संगठनों ने उम्मीद जताई है कि विभाग शीघ्र निर्णय लेकर शिक्षकों के हित में सकारात्मक कदम उठाएगा, ताकि कोई भी पात्र शिक्षक सीटेट परीक्षा से वंचित न रह जाए।

सीटेट परीक्षा के लिए शिक्षकों को अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने की मांग
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