लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को 10 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूर्ण होने पर चयन वेतनमान दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन प्रदेश के हजारों शिक्षक इस अधिकार से अब तक वंचित हैं। सेवा अवधि पूरी होने के तीन माह बीत जाने के बाद भी चयन वेतनमान न लगने से शिक्षकों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
शिक्षकों का कहना है कि प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभागीय स्तर पर पोर्टल मेंटेनेंस और तकनीकी समस्या का हवाला देकर चयन वेतनमान की प्रक्रिया रोक दी गई है। बार-बार शिकायत और अनुरोध के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल पा रहा है, जिससे शिक्षकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
शिक्षक संगठनों के अनुसार, इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से लेकर शासन स्तर तक अवगत कराया जा चुका है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। चयन वेतनमान में लापरवाही बरतने वाले कई जिलों की समीक्षा बैठक हो चुकी है, फिर भी जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
प्रदेश में लगभग 50 हजार शिक्षकों का चयन वेतनमान लंबित बताया जा रहा है। विशेष रूप से विज्ञान एवं गणित सहित हाल के वर्षों में नियुक्त शिक्षकों के 10 वर्ष पूरे हो चुके हैं, फिर भी उन्हें इसका लाभ नहीं मिल सका है।
शिक्षक संघों का कहना है कि जब विभागीय कार्यों की बात आती है तो नियमों का सख्ती से पालन कराया जाता है, लेकिन शिक्षकों के अधिकारों के मामले में तकनीकी बहाने बनाकर प्रक्रिया को टाला जा रहा है। संघों ने मांग की है कि यदि ऑनलाइन प्रणाली में समस्या है तो तत्काल प्रभाव से ऑफलाइन चयन वेतनमान की कार्यवाही पूरी की जाए।
शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।


