CBSE बोर्ड ने 9वीं और 11वीं के आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) नियमों में किया बदलाव।
केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE ने 9वीं और 11वीं की आंतरिक परीक्षाओं के नियमों में बदलाव किया है। अब 2026 से इन कक्षाओं में भी 10वीं और 12वीं के समान उत्तीर्ण मानदंड लागू होंगे। यह निर्णय छात्रों और अभिभावकों से मिली शिकायतों के बाद लिया गया है क्योंकि अलग-अलग स्कूलों में उत्तीर्ण मानदंड अलग-अलग थे जिससे छात्रों पर दबाव बढ़ता था। अब एक समान मानक लागू होगा।
1. एकरूप उत्तीर्ण मानदंड
2026 से कक्षा 9वीं और 11वीं में उत्तीर्ण मानदंड 10वीं और 12वीं के समान लागू होंगे, ताकि विभिन्न स्कूलों द्वारा लागू किए जाने वाले अलग-अलग पासिंग मानक समाप्त हों और छात्रों पर से अनावश्यक दबाव हटे।
2. आंतरिक मूल्यांकन का मानकीकरण
बोर्ड ने साइंस विषय (क्लास 6–12) में आंतरिक मूल्यांकन के असंगत और संभावित मार्क इनफ्लेशन की समस्या को दूर करने के लिए British Council के साथ मिलकर एक फ्रेमवर्क विकसित करने का निर्णय लिया है।
इसके साथ ही, बोर्ड ने उन स्कूलों को निगरानी और प्रशिक्षण के माध्यम से मूल्यांकन में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु कार्यशालाएं आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है।
पूर्व में, CBSE ने लगभग 500 स्कूलों में थ्योरी और प्रैक्टिकल अंकों में अंतर पाए जाने पर स्कूलों को मूल्यांकन प्रक्रियाओं को पुनर्परीक्षण करने का निर्देश भी जारी किया था।
3. दो-स्तरीय पाठ्यक्रम—विज्ञान और सामाजिक विज्ञान
2026 से कक्षा 9 में विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषयों के लिए दो स्तर—‘Standard’ और ‘Advanced’—लाने की नीति को बोर्ड की संचालन समिति द्वारा मंजूर किया गया है। छात्रों को दोनों स्तरों में से एक चुनने का विकल्प मिलेगा।
NCERT को दोनों स्तरों के लिए नए पाठ्य-पुस्तक विकसित करने का कार्य भी सौंपा गया है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता प्रदान करना भी है।
4. ओपन-बुक परीक्षा (Open-Book Exam)
CBSE ने कक्षा 9 के लिए 2026–27 शैक्षणिक सत्र से ओपन-बुक परीक्षा (OBE) लागू करने का निर्णय लिया है, जो NEP 2020 और NCFSE 2023 के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह कदम एक सफल पायलट अध्ययन के बाद घोषित किया गया, जिसमें इस विधा की व्यवहार्यता और स्वीकार्यता का परीक्षण किया गया।
शिक्षकों और प्रधानाचार्यों ने स्वागत में कहा कि प्रश्न विश्लेषणात्मक और अवधारणा-आधारित होने चाहिए, जिससे छात्र केवल रटने के बजाय गहराई से समझें। हालांकि, कुछ ने इस परिवर्तन की तैयारी में समय की कमी पर भी चिंता जताई।
5. कक्षा 10: वर्ष में दो बोर्ड परीक्षा
CBSE ने घोषणा की है कि 2026 से कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाएगी—प्रथम परीक्षा अनिवार्य होगी और दूसरी सुधार/सुधारात्मक प्रयास के लिए वैकल्पिक। बेहतर अंक को अंतिम परिणाम के रूप में माना जाएगा।
इन परीक्षाओं के परिणाम आधिकारिक मार्कशीट और डिजिटल पास सर्टिफिकेट में दर्शाए जाएंगे। आंतरिक मूल्यांकन एक ही बार होगा।
6. डिजिटल सुधार और पहचान प्रणाली
सीबीएसई बोर्ड ने “One Nation, One Student ID” के अंतर्गत Apaar ID (12 अंकों का यूनिक छात्र पहचान) को 2025–26 से आवश्यक कर दिया है—जिसके बिना छात्र बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे।
साथ ही, बोर्ड डिजिटल मूल्यांकन (Digital Evaluation) की ओर भी बढ़ रहा है, ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया में तेजी, सटीकता और पारदर्शिता बनी रहे।


