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बेसिक स्कूलों के मर्जर पर महत्वपूर्ण सुनवाई आज, इस मामले में सरकार स्पष्ट कर चुकी है अपनी योजना

Sir Ji Ki Pathshala 0

बेसिक स्कूलों के मर्जर पर महत्वपूर्ण सुनवाई आज, इस मामले में सरकार स्पष्ट कर चुकी है अपनी योजना

प्रदेश के परिषदीय स्कूलों के विलय मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में 21 अगस्त को सुनवाई होगी। मुख्य न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष विशेष अपीलें सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार को सूचीबद्ध हैं।

बीती 24 जुलाई को हाईकोर्ट ने विलय प्रक्रिया में उजागर हुई स्पष्ट अनियमितताओं के मद्देनजर सीतापुर के स्कूलों के विलय पर यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यह अंतरिम आदेश देते समय अदालत ने स्कूलों के विलय या मर्जर की सरकार की नीति और इसपर अमल करने की मेरिट पर कुछ नहीं किया है।

मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ के समक्ष 24 जुलाई को विशेष अपीलों पर राज्य सरकार व बेसिक शिक्षा विभाग के अधिवक्ताओं ने बहस की थी। अदालत के सामने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए विलय के कुछ दस्तावेजों में अनियमितताएं सामने आईं थीं। राज्य सरकार की ओर से इनका स्पष्टीकरण देने का समय मांगा गया था। जिनके मद्देनजर कोर्ट ने सीतापुर जिले में स्कूलों की विलय/पेयरिंग प्रक्रिया पर 21 अगस्त तक मौजूदा स्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया था। अदालत ने अपीलकर्ताओं को राज्य सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे पर जवाब पेश करने को अगली सुनवाई तक का समय दिया था।

पहली विशेष अपील सीतापुर के 5 बच्चों ने, और दूसरी भी वहीं के 17 बच्चों ने अपने अभिभावकों के जरिए दाखिल की है। इनमें स्कूलों के विलय में एकल पीठ द्वारा बीती 7 जुलाई को दिए गए फैसले को चुनौती देकर रद्द करने का आग्रह किया गया है। याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डाॅ. एलपी मिश्र व अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने दलीलें दीं थीं। जबकि, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनुज कुदेसिया, मुख्य स्थाई अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह के साथ बहस की थी।

बीती 7 जुलाई को स्कूलों के विलय मामले में एकल पीठ ने प्राथमिक स्कूलों के विलय आदेश को चुनौती देने वाली दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया था। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यह फैसला सीतापुर के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले 51 बच्चों समेत एक अन्य याचिका पर दिया था। इनमें बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा बीती 16 जून को जारी उस आदेश को चुनौती देकर रद्द करने का आग्रह किया गया था, जिसके तहत प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों की संख्या के आधार पर उच्च प्राथमिक या कंपोजिट स्कूलों में विलय करने का प्रावधान किया गया है।

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