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सत्र 2025-26 से पहली बार कक्षा 3 से 12वीं तक के छात्रों का भी निपुण मूल्यांकन कराने की तैयारी

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सत्र 2025-26 से पहली बार कक्षा 3 से 12वीं तक के छात्रों का भी निपुण मूल्यांकन कराने की तैयारी

लखनऊ। देश और प्रदेश में शिक्षा मंत्रालय की पहल पर कक्षा एक व दो के बच्चों के भाषा व गणितीय ज्ञान के मूल्यांकन के लिए निपुण आंकलन कराया जाता है। वहीं अब प्रदेश सरकार की ओर से पहली बार नए सत्र 2025-26 से कक्षा तीन से 12वीं तक के छात्रों का भी निपुण मूल्यांकन कराया जाएगा। इसके लिए राज्य परियोजना निदेशालय की ओर से निपुण प्लस एप तैयार किया है।

प्रदेश में बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए विभिन्न स्तर पर कवायद व योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। दिसंबर 2024 व फरवरी 2025 में कराए गए कक्षा एक व दो के बच्चों के निपुण मूल्यांकन में प्रदेश के 48061 विद्यालय निपुण घोषित किए गए हैं। इसे अब और बेहतर करने की कवायद चल रही है।

इसी क्रम में दूसरी तरफ अब कक्षा तीन से 12 के छात्रों के भी निपुण मूल्यांकन के लिए निपुण प्लस एप मुख्यमंत्री द्वारा शुरू किया गया है। इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से प्रश्नावली तैयार कर इस एप पर अपलोड की गई है।

शिक्षकों का नवाचार एक-दूसरे को करेगा प्रेरित

एससीईआरटी की ओर से प्रदेश भर के शिक्षकों के पठन-पाठन से जुड़े नवाचारों का एक संग्रह अनुरूपण के रूप में किया गया है। इसे प्रदेश के सभी विद्यालयों में भेजा जाएगा, इसके माध्यम से अन्य शिक्षक भी नए तरीके से पठन-पाठन के लिए प्रेरित होंगे। वहीं एससीईआरटी की ओर से विकसित नई किताब सारथी भी शिक्षकों को प्रशिक्षण के नए प्रयोगों से परिचित कराएगी।

दस करोड़ से बनेगा एजुकेशनल ब्रॉडकास्टिंग स्टूडियो

समग्र शिक्षा की ओर से राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान में एजुकेशनल ब्रॉडकास्टिंग स्टूडियो की स्थापना की जाएगी। इसके लिए शिक्षा मंत्रालय ने 10 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है। स्टूडियो में अत्याधुनिक कैमरों, प्रोडक्शन मिक्सर, इंटरैक्टिव डिस्प्ले व वीडियो संपादन की सुविधा होगी। इसमें वर्चुअल कक्षाओं के लिए ग्रीन स्क्रीन और बेहतर प्रकाश उपकरण भी लगाए जाएंगे। स्टूडियो के माध्यम से छात्रों को अधिक रोचक व प्रभावी शिक्षण सामग्री तैयार कर उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके माध्यम से हर तीन महीने में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम का औचक मूल्यांकन किया जा सकेगा। इसके लिए शिक्षक, मेंटर व डीएलएड प्रशिक्षुओं के माध्यम से मूल्यांकन किया जा सकेगा।

अभी कक्षा एक व दो के बच्चों का भाषा व गणित का मूल्यांकन किया जाता है। जबकि कक्षा तीन से 12 में भाषा, गणित के साथ-साथ पर्यावरण विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, साइंस आदि के सवाल भी शामिल किए गए हैं।

इससे एक तरफ जहां निपुण मूल्यांकन के जरिए मिलने वाले गैप को निर्धारित समय पर सुधारा जाएगा। वहीं पाठ्यक्रम को भी समय से पूरा करने में सहयोग मिलेगा। राज्य परियोजना निदेशालय की यह कवायद शैक्षिक गुणवत्ता के सुधार में सहयोगी होगी।

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