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RNI ने हजारो अखबारों पर लगाई रोक; ‘Voice of Media’ ने जताई कड़ी आपत्ति

Sir Ji Ki Pathshala

RNI ने हजारो अखबारों पर लगाई रोक; ‘Voice of Media’ ने जताई कड़ी आपत्ति

स्थानीय पत्रकारों की आवाज़ दबाने की कोशिश – संदीप काळे

नई दिल्ली– भारत के समाचार पत्र रजिस्ट्रार (RNI) ने देशभर के 99,173 पंजीकृत स्थानीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं को ‘निष्क्रिय (DEFUNCT)’ घोषित कर दिया है। यह निर्णय उन प्रकाशनों पर लागू किया गया है, जिन्होंने पिछले पांच वर्षों में वार्षिक विवरण (Annual Statement) ऑनलाइन जमा नहीं किया।

इस फैसले से स्थानीय, ग्रामीण और छोटे स्तर पर काम करने वाले मीडिया संस्थानों को गहरा झटका लगा है। अनेक संपादक, पत्रकार, मुद्रक और प्रकाशक अब संकट की स्थिति में हैं, और उनका भविष्य अधर में लटका है। पत्रकार संगठनों ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि यह स्थानीय पत्रकारों की आवाज़ को दबाने का प्रयास है।

इस संदर्भ में, देशव्यापी पत्रकार संगठन ‘वॉइस ऑफ मीडिया’ के संस्थापक अध्यक्ष संदीप काळे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस निर्णय के प्रति गंभीर आपत्ति जताई है। अपने पत्र में उन्होंने लिखा, “यह निर्णय स्थानीय पत्रकारिता की आवाज़ को बंद करने का एक सुनियोजित प्रयास प्रतीत होता है। जो छोटे मीडिया संस्थान जनता की समस्याएं, प्रशासन की त्रुटियां और भ्रष्टाचार उजागर करते हैं, उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से चुप कराया जा रहा है।”

काळे ने यह भी कहा कि कई समाचार पत्रों ने “पुनःप्रकाशन (Republication)” के लिए आवेदन किए थे, लेकिन उन्हें प्रेस रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (PRGI) द्वारा तकनीकी कारणों से बार-बार खारिज किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह मीडिया की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है, और इस निर्णय को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।”

‘वॉइस ऑफ मीडिया’ संगठन ने इस निर्णय के खिलाफ देशभर में आंदोलन शुरू करने की तैयारी कर ली है। कई राज्यों के पत्रकार संगठन और संपादक इस आंदोलन से जुड़ने के लिए तैयार हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि RNI ने अपनी नीति में शीघ्र बदलाव नहीं किया, तो दिल्ली में केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन या धरना आयोजित किया जाएगा।

संदीप काळे ने कहा, “यदि स्थानीय और छोटे समाचार पत्र बंद हो गए, तो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कमजोर हो जाएगा। गांव, तहसील और जिलों की आवाज़ कौन उठाएगा? ऐसी सीधी रोक एक गंभीर संकट है।”

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