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Surplus Teachers पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: 15 सितंबर के फैसले से स्थिति साफ, 13 अक्टूबर को अगली सुनवाई

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सरप्लस (अतिरिक्त) शिक्षकों के समायोजन और पुनर्तैनाती (Redeployment) को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। स्पेशल अपील संख्या 398/2026 की सुनवाई के दौरान 15 सितंबर 2026 को दिए गए इस आदेश से सरप्लस शिक्षकों की वैधानिक स्थिति अब दो अलग-अलग वर्गों में साफ हो गई है। कोर्ट के रुख से स्पष्ट है कि जिन शिक्षकों ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी, उनका तबादला आगे बढ़ेगा; जबकि आपत्ति दाखिल करने वाले शिक्षकों के लिए कानूनी लड़ाई अभी बाकी है।

UP Surplus Teachers High Court Order:

​दो वर्गों में बंटी सरप्लस शिक्षकों की स्थिति

​हाईकोर्ट के 15 सितंबर के आदेश के बाद शिक्षकों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में देखा जा रहा है:

​1. नॉन-ऑब्जेक्टर शिक्षक (जिन्होंने आपत्ति दर्ज नहीं की)

  • ​रिपोर्ट संख्या 10 का दायरा: राज्य सरकार द्वारा कोर्ट में पेश की गई Report No. 10 में 6 जिलों—फतेहपुर, झांसी, कानपुर देहात, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और सुल्तानपुर के ऐसे सहायक अध्यापकों का ब्योरा दिया गया है, जिन्हें सरप्लस घोषित किया गया था और उन्होंने अपने पुनर्तैनाती आदेश के खिलाफ कोई आपत्ति (Objection) दाखिल नहीं की।
  • ​रोक हटी, तबादले की छूट: कोर्ट ने ऐसे शिक्षकों के पक्ष में पूर्व में दिए गए अंतरिम आदेश (Interim Order) को हटा (Vacate) दिया है। राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह दो सप्ताह के भीतर इनके रिडिप्लॉयमेंट/तबादला आदेश जारी कर सकती है।

​2. ऑब्जेक्टर शिक्षक (जिन्होंने आपत्ति दर्ज कराई थी)

  • ​जिन शिक्षकों ने सरप्लस सूची के खिलाफ तय समय में आपत्ति दाखिल की थी, उनके मामले अभी बंद नहीं हुए हैं।
  • ​राज्य सरकार ने जिलेवार आपत्तियों और उन पर पारित आदेशों को कोर्ट के समक्ष रिकॉर्ड पर रखने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है।
  • ​कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल आपत्ति निरस्त (Reject) हो जाने से मामला खत्म नहीं माना जाएगा। सक्षम अधिकारी द्वारा दिए गए रिजेक्शन ऑर्डर की वैधता और तार्किकता की जांच केस-वाइज हलफनामे के आधार पर की जाएगी।

​‘हेड कार्यरत + सहायक सरप्लस’ मामलों में कानूनी पेच

​कई विद्यालयों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं जहाँ प्रधानाध्यापक (Headmaster) वास्तविक रूप से कार्यरत हैं, फिर भी उसी विद्यालय के सहायक अध्यापक (Assistant Teacher) को सरप्लस घोषित कर दिया गया।

​कानूनी जानकारों के अनुसार, ऐसे मामलों में यह देखना अनिवार्य होगा कि:

  • ​विद्यालय में छात्र संख्या के अनुपात में शिक्षकों की स्वीकृत (Sanctioned) व आवश्यक (Required) संख्या कितनी है?
  • ​छात्र-शिक्षक अनुपात की गणना में प्रधानाध्यापक को किस प्रकार गिना गया?
  • ​U-DISE और प्रेरणा पोर्टल (Prerna Portal) पर दर्ज विवरण तथा जमीनी स्थिति में कोई विसंगति तो नहीं है?
  • ​क्या बीएसए (BSA) या संबंधित प्राधिकारी ने आपत्ति खारिज करते समय इन तकनीकी बिंदुओं पर कोई स्पष्ट निष्कर्ष (Finding) दर्ज किया है?

​प्रभावित शिक्षक तुरंत जुटाएं ये 8 महत्वपूर्ण दस्तावेज

​हाईकोर्ट के निर्देशों के आलोक में सरप्लस सूची से प्रभावित प्रत्येक शिक्षक को अपने पास निम्नलिखित अभिलेख सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है:

  1. ​सरप्लस सूची की प्रति जिसमें नाम दर्ज हो।
  2. ​दाखिल की गई मूल आपत्ति (Original Objection) की प्रति।
  3. ​आपत्ति जमा करने की रिसीविंग अथवा डायरी नंबर।
  4. ​आपत्ति पर पारित निरस्तीकरण आदेश (Rejection Order)।
  5. ​विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों की वर्तमान वास्तविक स्थिति का प्रमाण।
  6. ​विद्यालय में प्रधानाध्यापक के कार्यरत होने का पुख्ता अभिलेख।
  7. ​U-DISE और प्रेरणा पोर्टल पर दर्ज शिक्षकों का आधिकारिक डेटा।
  8. ​विद्यालय की स्वीकृत एवं आवश्यक पद संख्या से संबंधित अभिलेखीय साक्ष्य।

​अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को

​माननीय हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 तय की है। अगली तारीख से पहले राज्य सरकार को सभी आपत्तियों और उन पर जारी आदेशों का पूरा रिकॉर्ड अदालत में पेश करना होगा। साथ ही जिलों की आधिकारिक वेबसाइट्स पर भी आपत्तियों के निस्तारण आदेश अपलोड करने की व्यवस्था की जा रही है।

​निष्कर्ष: 15 सितंबर का आदेश मामले का अंतिम पटाक्षेप नहीं है। यदि किसी शिक्षक का नाम रिपोर्ट संख्या 10 (नॉन-ऑब्जेक्टर) में है तो उनका समायोजन तय है। वहीं जिन शिक्षकों की आपत्ति खारिज हुई है, वे रिजेक्शन के आधार और नियमों के उल्लंघन को आधार बनाकर विधिक लड़ाई को आगे बढ़ा सकते हैं।

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