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यूपी में विशेष टीईटी और विभागीय परीक्षा पर क्या बोले उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष? देखें वीडियो

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने विशेष टीईटी और विभागीय परीक्षा पर कड़ा बयान दिया है। जानें पूरी खबर विस्तार

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित विभागीय टीईटी (TET) परीक्षा और शिक्षकों की योग्यता व पात्रता के मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी है। वीडियो में उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षकों की कार्यकुशलता और योग्यता पर सवाल उठाना और बार-बार परीक्षाएं थोपना न्यायसंगत नहीं है।

​दिनेश चंद्र शर्मा का कहना है कि उत्तर प्रदेश का शिक्षक पहले से ही पूरी तरह वेल-क्वालिफाइड और अत्यधिक प्रतिभाशाली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'राइट टू एजुकेशन' (RTE) कानून में कहीं भी 'TET' शब्द का उल्लेख नहीं है, बल्कि उसमें केवल न्यूनतम अर्हता (Minimum Qualification) की बात कही गई है। एनसीटीई (NCTE) के नियमानुसार 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य नहीं था, यह प्रावधान उसके बाद के शिक्षकों के लिए है।

Dr. DINESH CHANDRA SHARMA

​सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए रिव्यू और विभागीय डेटा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में बिना टीईटी वाले शिक्षकों की संख्या में अंतर देखने को मिलता है। जहां पहले 1,86,000 शिक्षक बिना टीईटी के बताए गए थे, वहीं विभागीय डेटा में यह संख्या 1,42,000 दर्शाई गई। उनका तर्क है कि जब अधिकांश शिक्षक पहले ही सीटीईटी (CTET) या यूपीटीईटी (UPTET) पास कर चुके हैं, तो बार-बार विभागीय परीक्षा के नाम पर शिक्षकों का परीक्षण करने का कोई औचित्य नहीं बनता है।

​शर्मा जी ने तंज कसते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षकों की चयन प्रक्रिया डिग्री कॉलेजों या अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों की तुलना में कहीं अधिक कठिन और पारदर्शी रही है। उन्होंने कड़ा ऐतराज़ जताया कि जो शिक्षक सरकार की संपूर्ण सेवा शर्तों को पूरा करते हुए वर्षों से सेवा दे रहे हैं, उन्हें टीईटी जैसी परीक्षाओं के दायरे में खींचना और विरोध के नाम पर राजनीति करना पूरी तरह गलत है।

​उन्होंने जोर देकर कहा कि टीईटी और शिक्षक पात्रता से जुड़े नीतिगत मुद्दे संसद और राष्ट्र स्तर के हैं, जिनका समाधान केवल नीतिगत संशोधनों के माध्यम से ही संभव है, न कि बार-बार शिक्षकों पर नई परीक्षाएं थोपकर। उन्होंने अंत में स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ हमेशा शिक्षकों के अधिकारों और सम्मान के लिए खड़ा रहा है और आगे भी सरकार के समक्ष शिक्षकों की आवाज पूरी मजबूती से उठाता रहेगा।