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NEET UG Re-Exam: फुलप्रूफ सुरक्षा के बीच 21 जून को दोबारा इम्तिहान, एमआई-17 हेलीकॉप्टर से भेजे जाएंगे प्रश्नपत्र

NEET UG Re-Exam: वायुसेना के Mi-17 हेलीकॉप्टर से भेजे जाएंगे नीट के प्रश्नपत्र, सेना संभालेगी सुरक्षा। पूरी जानकारी के लिए पढ़ें।

नई दिल्ली: मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए आगामी 21 जून को दोबारा होने जा रही नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा को पूरी तरह लीक-प्रूफ और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। इस बार परीक्षा के आयोजन में अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं, जिसकी कमान सीधे सेना और सरकारी तंत्र के हाथों में सौंपी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीधी निगरानी में तैयार की गई इस नई रणनीति में किसी भी बाहरी तत्व या निजी एजेंसी की भूमिका को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।

NEET UG Re-exam paper transport by Air Force Mi 17 helicopter

​एमआई-17 हेलीकॉप्टर से भेजे जाएंगे प्रश्नपत्र

​परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्रों को दिल्ली से देश के 18 चुनिंदा लोकेशंस तक पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना के एमआई-17 (Mi-17) हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जाएगा। वहां से प्रश्नपत्रों को सेना के लॉजिस्टिक सेंटरों और फिर देश भर के 551 परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने का जिम्मा सेना और अर्धसैनिक बलों को दिया गया है।

​पहली बार सिर्फ सरकारी विशेषज्ञों ने तैयार किया पेपर

​नीट के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया से बाहरी और निजी एजेंसियों को दूर रखा गया है। इस बार का पेपर पूरी तरह सरकारी प्रोफेसरों और वरिष्ठ शिक्षकों की देखरेख में तैयार किया गया है। इसके बाद, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की आधुनिक अनुवाद तकनीक का उपयोग करके इस प्रश्नपत्र का हिंदी, अंग्रेजी समेत 13 क्षेत्रीय भाषाओं में सुरक्षित अनुवाद किया गया है।

​हाईटेक सुरक्षा ग्रिड: जीपीएस, लाइव कैमरे और डिजिटल पासवर्ड

​इस बार परीक्षा केंद्रों तक पेपर पहुंचाने और उन्हें खोलने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और ट्रैक करने योग्य बनाया गया है:

  • मंत्रालयों की उच्चस्तरीय समिति: प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन के लिए शिक्षा, रक्षा, गृह, संचार और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है, जो सीधे पीएमओ (PMO) और कैबिनेट सचिवालय को रिपोर्ट कर रही है।
  • जीपीएस और लाइव कैमरे से निगरानी: हवाई जहाज से उतरने के बाद ट्रंक बॉक्स को सेना के वाहनों और डाक विभाग के जरिए केंद्रों तक भेजा जाएगा। इन सभी वाहनों को जीपीएस (GPS) और लाइव कैमरों से लैस किया गया है, ताकि कंट्रोल रूम से हर सेकंड की गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
  • परीक्षा से ठीक पहले खुलेगा पासवर्ड: परीक्षा केंद्रों पर रखे बॉक्स पारंपरिक चाबी से नहीं, बल्कि डिजिटल पासवर्ड से खुलेंगे। परीक्षा शुरू होने से चंद मिनट पहले सेना के जवान कंट्रोल रूम से कोड मिलने के बाद ही इन्हें खोल सकेंगे। यह पासवर्ड परीक्षा के दिन के हिसाब से बदलता रहेगा। इस दौरान केंद्र के चुनिंदा अधिकारियों की मौजूदगी अनिवार्य होगी, जिन्हें विशेष फोटो पहचान पत्र और पासवर्ड सूची दी जाएगी।

​सरकार का यह कड़ा रुख साफ संकेत देता है कि भविष्य में देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की शुचिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। 21 जून को होने वाली यह परीक्षा नए सुरक्षा मानकों के लिए एक मिसाल बनेगी।