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यूपीटीईटी प्रमाणपत्र सत्यापन में बड़ा खुलासा: 200 सर्टिफिकेट फर्जी और संदिग्ध, विभाग करेगा सख्त कार्रवाई

UPTET प्रमाणपत्र सत्यापन में बड़ा खुलासा! वर्ष 2011 से 2021 के बीच के 200 से अधिक सर्टिफिकेट फर्जी और संदिग्ध पाए गए। जानिए सीतापुर, गोंडा और देवरिया

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के प्रमाणपत्रों के सत्यापन (Verification) के दौरान एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच में लगभग 200 प्रमाणपत्र पूरी तरह फर्जी या संदिग्ध पाए गए हैं। यह सभी प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (PNP) द्वारा वर्ष 2011 से 2021 के बीच आयोजित परीक्षाओं के हैं। विभाग इन सभी मामलों में नियमों के तहत सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करने की तैयारी में है।

UPTET Certificate Verification News

​11 महीनों की जांच में खुली पोल

​विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई विभिन्न जिलों से मिली शिकायतों के आधार पर की गई है। संदिग्ध प्रमाणपत्रों की यह गहन जांच जून 2025 से मई 2026 के बीच चलाई गई।

​जांच के दायरे में प्रदेश के कई बड़े जिले शामिल थे, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • ​गाजियाबाद, गोंडा, देवरिया, अमेठी
  • ​शामली, संभल, बलरामपुर, मैनपुरी
  • ​फिरोजाबाद, सीतापुर, मथुरा, गाजीपुर
  • ​भदोही, बलिया और लखीमपुर खीरी

​सीतापुर और गोंडा में पकड़े गए फर्जी शिक्षक

​सत्यापन के दौरान कुछ जिलों में बेहद चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं:

  • सीतापुर का मामला: हाल ही में सीतापुर जिले से 7 शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्र जांच के लिए पीएनपी भेजे गए थे। जांच में सातों प्रमाणपत्र फर्जी (असत्य) पाए गए। इनमें से 5 शिक्षकों के रोल नंबर विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं थे, जबकि 2 मामलों में रोल नंबर किसी दूसरे अभ्यर्थियों के नाम पर अलॉट थे। इस संबंध में विभाग ने 26 फरवरी 2026 और 12 मई 2026 को संबंधित जिले को रिपोर्ट भेज दी है।
  • गोंडा का मामला: गोंडा जनपद से भेजे गए 5 शिक्षकों के प्रमाणपत्रों में भी भारी विसंगतियां मिली हैं। इस मामले की रिपोर्ट भी जल्द ही जिले को भेजी जा रही है।

​नाम और विवरण में संशोधन के खेल पर रोक

​अक्सर देखा गया है कि लोग नौकरी पाने के बाद या धांधली करने के इरादे से अपने प्रमाणपत्रों में नाम बदलवाने की कोशिश करते हैं। इस पर पीएनपी के रजिस्ट्रार विजेंद्र सिंह ने साफ किया है कि:

​"नाम या अन्य विवरणों में संशोधन केवल नियमानुसार ही संभव है। विशेषकर नियुक्ति (Job) मिलने के बाद किए जाने वाले संशोधनों की बहुत बारीकी से और अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर जांच की जाती है।"

​फर्जीवाड़े के दो बड़े उदाहरण (केस स्टडी):

  • केस 1: बिहार में नौकरी के बाद संशोधन का प्रयास देवरिया के एक युवक की हाल ही में बिहार में शिक्षक के पद पर नौकरी लगी। उसने पीएनपी से अपने नाम में संशोधन की मांग की, जिसे पीएनपी ने खारिज कर दिया क्योंकि उसने नियुक्ति से पहले आवेदन नहीं किया था। बाद में उसने सीबीएसई बोर्ड के जरिए नाम बदलवाने का प्रयास किया।
  • केस 2: बहन के सर्टिफिकेट पर भाई का दावा आजमगढ़ के एक युवक ने पीएनपी कार्यालय में आवेदन देकर दावा किया कि उसके सर्टिफिकेट पर गलती से उसकी बहन का नाम दर्ज हो गया है। अधिकारियों को शक हुआ कि वह अपनी बहन के सर्टिफिकेट में हेरफेर कर नौकरी हथियाने की फिराक में है, क्योंकि सीतापुर में भी ऐसा ही एक भाई-बहन का फर्जीवाड़ा पकड़ा जा चुका है।

​परीक्षाओं के आयोजन का सफरनामा

​उत्तर प्रदेश में टीईटी परीक्षाओं के आयोजन की जिम्मेदारी समय-समय पर बदलती रही है:

  • वर्ष 2011: पहली यूपीटीईटी परीक्षा का आयोजन माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा किया गया था।
  • वर्ष 2013 से 2021: इसका सफल संचालन उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (PNP) ने किया।
  • वर्तमान व्यवस्था: अब इस परीक्षा और इसके संचालन का पूरा दायित्व उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा आयोग को सौंप दिया गया है।

​पीएनपी के सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि जिलों से जैसे-जैसे सत्यापन के अनुरोध प्राप्त होते हैं, विभाग पूरी पारदर्शिता के साथ रिकॉर्ड्स का मिलान कर जांच रिपोर्ट सौंप देता है। फर्जी पाए गए मामलों में संबंधित जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) द्वारा आगे की कानूनी कार्रवाई (जैसे एफआईआर और बर्खास्तगी) की जाएगी।