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आयकर नियमों में बड़ा बदलाव: 1 अप्रैल 2026 से कई लेन-देन और कर छूट में पैन (PAN) अनिवार्य

​"1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए आयकर नियमों की पूरी जानकारी। जानें बच्चों के शिक्षा और हॉस्टल भत्ते में कितनी वृद्धि हुई?

भारत में कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने के लिए सरकार 1 अप्रैल 2026 से नए आयकर नियम लागू करने जा रही है। इन बदलावों का सीधा असर वेतनभोगी कर्मचारियों, व्यापारियों और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ेगा। जहाँ एक ओर शिक्षा भत्ते में ऐतिहासिक वृद्धि की गई है, वहीं दूसरी ओर कई वित्तीय लेन-देन के लिए पैन कार्ड की अनिवार्यता को कड़ा कर दिया गया है।

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​1. शिक्षा और हॉस्टल भत्ते में भारी बढ़ोतरी

​लंबे समय से स्थिर पड़े शिक्षा भत्तों में सरकार ने बड़ी राहत दी है:

  • बच्चों का शिक्षा भत्ता: अब तक यह मात्र ₹100 प्रति माह था, जिसे बढ़ाकर अब ₹3,000 प्रति माह कर दिया गया है।
  • हॉस्टल भत्ता: इसे ₹300 से बढ़ाकर ₹9,000 प्रति माह कर दिया गया है।
  • शर्त: यह छूट अधिकतम दो बच्चों तक ही सीमित रहेगी।

​2. इन वित्तीय कार्यों के लिए अब PAN होगा अनिवार्य

​टैक्स चोरी रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार ने निम्नलिखित स्थितियों में पैन कार्ड देना अनिवार्य कर दिया है:

  • किराया भुगतान: यदि सालाना मकान किराया ₹1 लाख से अधिक है, तो मकान मालिक का पैन, नाम और पता देना होगा।
  • वाहन और संपत्ति: ₹5 लाख से महंगी गाड़ी खरीदने और ₹20 लाख से अधिक की संपत्ति के लेन-देन पर पैन जरूरी है।
  • अन्य सेवाएँ: महंगे होटल की बुकिंग, LTC (Leave Travel Concession) और होम लोन के दावों के लिए भी पैन देना होगा।
  • लेन-देन सीमा: यदि साल भर में ₹10 लाख से अधिक का वित्तीय लेन-देन किया जाता है, तो पैन कार्ड प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

​3. आयकर नियमों में अन्य महत्वपूर्ण बदलाव (2026)

  • ITR दाखिल करने की नई समय-सीमा: व्यापारियों और प्रोफेशनल्स के लिए ITR-3 और ITR-4 भरने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर अब 31 अगस्त कर दिया गया है। हालांकि, व्यक्तिगत करदाताओं के लिए (ITR-1 और 2) अंतिम तारीख 31 जुलाई ही रहेगी।
  • विदेश भेजने वाली राशि (TCS) में कटौती: यदि आप विदेश में पढ़ाई या इलाज के लिए ₹10 लाख से अधिक की राशि भेजते हैं, तो उस पर लगने वाला TCS (Tax Collected at Source) अब 5% के बजाय घटकर मात्र 2% रह जाएगा।
  • संशोधित रिटर्न (Revised Return) की सुविधा: टैक्स पेयर्स अब 31 मार्च तक अपना संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। ध्यान रहे कि इसके लिए निर्धारित शुल्क (Late Fee/Penalty) देना अनिवार्य होगा।
  • निवेशकों के लिए TDS से राहत: निवेशक अब अपनी निवेश आय पर अतिरिक्त टैक्स कटने से बचाने के लिए फॉर्म 15G या 15H सीधे डिपॉजिटरी में जमा कर सकेंगे। इससे उन्हें बार-बार रिफंड के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और ड्राइवर भत्ता: नए नियमों के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग पर टैक्स छूट दी जाएगी। यदि कंपनी कर्मचारी के EV का खर्च उठाती है, तो ₹5,000 प्रति माह (वाहन के लिए) और ₹3,000 प्रति माह (ड्राइवर के लिए) अतिरिक्त भत्ते के रूप में जोड़े जाएंगे।