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72,000 और 69,000 शिक्षक भर्ती के विवादों को सुलझाने के लिए शासन ने कसी कमर, लोकभवन में बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक

​उत्तर प्रदेश शिक्षक भर्ती मामले में बड़ी खबर! कल लखनऊ के लोक भवन में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 72,000 और 69,000 शिक्षक भर्ती को लेकर हाई-लेवल बैठक

शिक्षक भर्ती पर लखनऊ में हलचल: मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 'पावर मीटिंग' आज, क्या निकलेगा समाधान?

लखनऊ शिक्षक भर्ती न्यूज़: लोक भवन में कल अहम बैठक, कोर्ट की सख्ती के बाद शासन अलर्ट।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सालों से लंबित 72,000 और 69,000 शिक्षक भर्ती के विवादों को सुलझाने के लिए शासन ने अब कमर कस ली है। प्रशासनिक गलियारों से आ रही बड़ी खबर के अनुसार, आज राजधानी के लोक भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। इस बैठक की अध्यक्षता प्रदेश के मुख्य सचिव करेंगे, जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहेंगे।

बैठक का मुख्य एजेंडा और उपस्थित अधिकारी

​इस महत्वपूर्ण मंथन में विभाग के उन चेहरों को शामिल किया गया है, जिनके पास इन भर्तियों का पूरा लेखा-जोखा है:

  • पार्थ सारथी सेन शर्मा: अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा।
  • पी.एस. बघेल: निदेशक, बेसिक शिक्षा।
  • सुरेंद्र तिवारी: सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद।

कोर्ट की सख्ती और शासन का दबाव

​सूत्रों की मानें तो यह बैठक केवल एक औपचारिक चर्चा नहीं है, बल्कि न्यायालय के बढ़ते दबाव का नतीजा है। खबर है कि अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन को माननीय न्यायालय द्वारा व्यक्तिगत रूप से तलब किया गया है। कोर्ट की इस सख्ती के बाद शासन स्तर पर हलचल तेज है और प्रयास किया जा रहा है कि कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।

अभ्यर्थियों की जागी उम्मीदें

​72,000 और 69,000 शिक्षक भर्ती मामले पिछले कई वर्षों से कानूनी दांव-पेंच और आरक्षण विवादों के कारण सुर्खियों में रहे हैं। हजारों अभ्यर्थी नियुक्ति की आस में धरना-प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। कल होने वाली इस बैठक से निम्नलिखित बिंदुओं पर निर्णय की संभावना है:

  1. ​कोर्ट में विभाग द्वारा पेश किए जाने वाले हलफनामे का प्रारूप।
  2. ​लंबित पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को गति देने की संभावना।
  3. ​विधिक अड़चनों को दूर करने के लिए वैकल्पिक समाधान।
विशेष नोट: यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें सीधे मुख्य सचिव दखल दे रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि सरकार अब इन संवेदनशील मामलों को जल्द से जल्द निस्तारित करना चाहती है।