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शिक्षक समायोजन प्रकरण: आज की अदालती कार्यवाही का सार

UP शिक्षक समायोजन: हाईकोर्ट में एडवोकेट रजनीश तिवारी की प्रभावी बहस, 47,000 रिक्त पदों पर उठाए सवाल

आज एडवोकेट रजनीश तिवारी द्वारा शिक्षक समायोजन के मुद्दे पर न्यायालय के समक्ष अत्यंत विस्तृत और प्रभावी बहस प्रस्तुत की गई। विधिक टीम ने शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई गंभीर तकनीकी और संवैधानिक प्रश्न उठाए।

High Court Hearing Teacher Samayojan UP

🔹 सुनवाई के दौरान उठाए गए प्रमुख बिंदु

  1. रिक्त पदों की स्थिति: विधानसभा में दिए गए उत्तर के विपरीत, विभाग में लगभग 47,000 पद रिक्त होने के बावजूद बार-बार समायोजन प्रक्रिया अपनाए जाने के औचित्य पर सवाल उठाया गया।
  2. समायोजन की निरंतरता: जब 'समायोजन 1' और 'समायोजन 2' की प्रक्रिया हाल ही में पूर्ण हुई थी, तो तत्काल 'समायोजन 3' की आवश्यकता क्यों पड़ी?
  3. पारदर्शिता का अभाव: विभाग द्वारा सरप्लस (Surplus) शिक्षकों की सूची को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
  4. विकल्पों की सीमित संख्या: पूर्व की प्रक्रियाओं की भांति शिक्षकों को 25 विकल्प चुनने का अवसर दिए बिना ही समायोजन क्यों किया जा रहा है?
  5. PTR निर्धारण का विधिक आधार: छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) के निर्धारण में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को 'शिक्षक' मानने का वैधानिक आधार क्या है?
  6. वरीयता की अनदेखी: समायोजन प्रक्रिया में महिला एवं दिव्यांग शिक्षकों को उचित वरीयता क्यों नहीं दी गई?
  7. विषयगत आवश्यकता: स्कूलों में विषयों की आवश्यकता (Subject-wise requirement) को दरकिनार कर समायोजन करने के तर्कों पर आपत्ति जताई गई।
  8. छात्र हित: कंपोजिट विद्यालयों, जहाँ पहले से ही पद रिक्त हैं, वहां से शिक्षकों को हटाया जाना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
  9. सहमति (Consent) का उल्लंघन: दिनांक 23/05/2025 के शासनादेश के अनुसार शिक्षक की सहमति अनिवार्य थी, जिसका पालन नहीं किया गया।
  10. नियमों में भिन्नता: पूरे प्रदेश में समायोजन के नियमों में एकरूपता (Uniformity) का अभाव स्पष्ट रूप से देखा गया।

⚠️ विशेष आपत्ति

​न्यायालय के समक्ष मुख्य रूप से यह पक्ष रखा गया कि 23/05/2025 के शासनादेश की अवहेलना करते हुए, बिना शिक्षक की लिखित सहमति के किया जा रहा समायोजन पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।

अपील व संदेश

​सभी शिक्षक साथियों से विनम्र निवेदन है कि इस चुनौतीपूर्ण समय में धैर्य और संयम बनाए रखें। अपने सभी आवश्यक अभिलेख (Documents) सुरक्षित रखें। विधिक टीम आपके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

— एडवोकेट रजनीश तिवारी

(माननीय उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ)

आपका शिक्षक साथी,

आनन्द प्रताप सिंह