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उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव: केंद्र सरकार बनाएगी राष्ट्रीय उच्च शिक्षा आयोग, यूजीसी–AICTE–NCTE हो सकते हैं समाप्त

उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव: केंद्र सरकार बनाएगी राष्ट्रीय उच्च शिक्षा आयोग, यूजीसी–AICTE–NCTE हो सकते हैं समाप्त

नई दिल्ली। केंद्र सरकार उच्च शिक्षा व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा ढांचागत बदलाव करने की तैयारी में है। संसद के शीतकालीन सत्र में राष्ट्रीय उच्च शिक्षा आयोग (National Higher Education Commission) के गठन के लिए विधेयक लाया जा सकता है। इस प्रस्ताव के तहत यूजीसी, AICTE और NCTE जैसे प्रमुख नियामक निकायों को समाप्त कर उनके स्थान पर एक ही आयोग के गठन की बात कही गई है।

संसद की कार्यसूची में राष्ट्रीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक, 2025 को शामिल भी कर लिया गया है।


उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव

एक ही आयोग से तेज होंगे फैसले: सरकार का तर्क

सरकार के अनुसार—

  • उच्च शिक्षा, अनुसंधान व वैज्ञानिक–तकनीकी संस्थानों में समन्वय स्थापित करने,
  • गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए एकरूप मानक तय करने,
  • और सभी नियामक निर्णयों को तेज व प्रभावी बनाने के लिए यह आयोग आवश्यक है।

नई शिक्षा नीति (NEP–2020) में भी भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (HECI) की अवधारणा शामिल है। यह विधेयक उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


कौन–कौन से संस्थान होंगे इसके दायरे में?

प्रस्तावित आयोग की संरचना के अनुसार—

  • यूजीसी
  • AICTE
  • NCTE

जैसी संस्थाओं को विलय कर एक ही नियामक निकाय बनाया जा सकता है।

हालाँकि—

  • कानून
  • और चिकित्सा शिक्षा

इन आयोगों के दायरे से बाहर रखे जाने की संभावना है।


संसदीय समिति ने जताई थी आपत्ति

इस प्रस्ताव पर पहले ही राज्यसभा की स्थायी समिति ने गंभीर चिंता जताई थी।
कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा था कि—

  • यूजीसी जैसे स्थापित निकायों को समाप्त करना शिक्षा प्रणाली में असंतुलन पैदा कर सकता है।
  • इससे उच्च शिक्षा में निजीकरण को बढ़ावा मिल सकता है।
  • देशभर के विविध विश्वविद्यालयों के संदर्भ में विभिन्न निकायों की भूमिका अचानक समाप्त कर देना व्यावहारिक नहीं होगा।

समिति ने सुझाव दिया था कि व्यवस्था को बदला जाए लेकिन—

“संस्थाओं को समाप्त करने के बजाय उन्हें आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप पुनर्गठित किया जाए।”


यदि यह विधेयक संसद से पारित हो गया, तो भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में 1956 से चली आ रही यूजीसी व्यवस्था का अंत हो सकता है।
वहीं, समर्थक इसे उच्च शिक्षा में पारदर्शिता, एकरूपता और त्वरित निर्णय प्रक्रिया की दिशा में ऐतिहासिक कदम मान रहे हैं।

सत्र में इस विधेयक पर होने वाली चर्चा अब शिक्षण जगत में बड़े बदलावों की दिशा तय करेगी।